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जमीन मालिकों के लिए बड़ी खबर: टुकड़ों में बिखरी जमीन को जोड़कर बनेगा सुनियोजित शहर, लैंड पूलिंग पॉलिसी लागू

Wed, 19 Aug 2026 02:00 PM IST
Nikita Gupta गौरव रावत अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

जम्मू-कश्मीर सरकार ने लैंड पूलिंग पॉलिसी-2026 लागू की है, जिसके तहत बिखरी जमीन को एक साथ विकसित कर सड़कों और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए 40% हिस्सा रखा जाएगा।
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सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
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जम्मू-कश्मीर सरकार ने लैंड पूलिंग पॉलिसी-2026 लागू कर दी है। प्रदेश में पहली बार ये नीति लाई गई है। इसके लागू होने से अब शहरी और नए क्षेत्रों को जमीन के अलग-अलग टुकड़ों के बजाय पूरे इलाके को व्यापक योजना के दायरे में लाकर विकसित किया जाएगा। इसमें शामिल कुल भूमि का 40 प्रतिशत हिस्सा सड़कों और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के लिए आरक्षित रखा जाएगा। शेष 60 प्रतिशत हिस्सा पूर्ण रूप से विकसित करने के बाद मूल भूमि मालिकों को उनकी दी गई जमीन के अनुपात में विकसित भूखंड यानी प्लॉट्स के रूप में मिलेंगे।

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यह नीति किसी भी इलाके में स्वतः लागू नहीं होगी। इसके क्रियान्वयन के लिए सबसे पहले संबंधित विकास प्राधिकरण उस विशिष्ट क्षेत्र को लैंड पूलिंग के लिए अधिसूचित करेगा। योजना को धरातल पर उतारने के लिए अधिसूचित क्षेत्र के कम से कम 70 प्रतिशत जमीन मालिकों की लिखित सहमति और भूमि का शामिल होना अनिवार्य है। इसके लिए भूमि मालिक आपस में एक समूह बनाएंगे और लिखित समझौते के आधार पर जमीन को योजना में शामिल करेंगे।

योजना में शामिल होने वाली जमीन का मालिकाना हक और कब्जा पूरी तरह से स्पष्ट व विवादमुक्त होना जरूरी है। जो जमीन शुरुआती चरण में इस योजना में शामिल नहीं हो सकेगी, उसे बाद में विकसित करने की अनुमति दी जा सकती है। इसके लिए संबंधित भूखंड तक पहुंच मार्ग, जरूरी ढांचागत सुविधाएं, सार्वजनिक सुविधाओं के लिए निर्धारित भूमि का हिस्सा देना और विकास शुल्क चुकाना होगा।

हर तरह की जमीन योजना में शामिल नहीं होगी, डेवलपर की भूमिका तय
वन, चरागाह, प्राकृतिक नाले और जल निकाय, विरासत स्थल, रेलवे और हवाई अड्डे की जमीन इससे बाहर रहेगी। मुकदमे या अधिग्रहण में फंसी जमीन भी मामला खत्म होने तक शामिल नहीं की जाएगी। अनधिकृत कॉलोनियों की जमीन भी योजना से बाहर रहेगी। जमीन मालिकों को एक साथ लाने और योजना तैयार करने में विकासकर्ता की भूमिका तय होगी। उसे विकास प्राधिकरण से लाइसेंस और जम्मू-कश्मीर रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण में पंजीकरण कराना होगा। जमीन मालिकों और विकासकर्ता के बीच हिस्से का बंटवारा योजना में तय होगा।

पानी, सीवरेज के लिए पहले से जगह रहेगी तय
जिस इलाके को योजना में लिया जाएगा वहां सड़क, पानी, सीवरेज, जल निकासी, बिजली और दूसरी जरूरी सुविधाओं के लिए भी जगह पहले से तय होगी। इन सुविधाओं का काम संबंधित विभागों के साथ मिलकर विकास प्राधिकरण कराएगा। नई योजनाओं में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए मकानों की जगह भी रखी जाएगी। 
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मालिकों को जमीन मिलेगी, पर विकास का कुछ खर्च उठाना होगा
योजना के दायरे में आने वाले भूमि मालिकों को विकसित भूखंड मिलेंगे, लेकिन जरूरी नहीं कि जहां उसकी मूल जमीन हो वहीं पर हिस्सा मिले। उन्हें नए भूखंड दिए जाएंगे। सरकार विकास का खर्च पूरी तरह नहीं उठाएगी। शहर की बड़ी सुविधाओं और इलाके के भीतर सड़क, पानी, सीवरेज जैसी सुविधाओं के लिए विकास शुल्क लिया जाएगा। इसकी रकम अभी नीति में तय नहीं की गई है। अगर योजना के लिए ऐसी जमीन की जरूरत पड़ती है जो लैंड पूलिंग में शामिल नहीं हुई है तो विकास प्राधिकरण कानून के मुताबिक उसे ले सकता है। इसका खर्च जमीन मालिकों के समूह या विकासकर्ता को उठाना होगा।

मंजूरी के छह माह में मिलेगा कब्जा
nजमीन मालिकों का समूह बनाने के लिए 60 दिन मिलेंगे। जरूरत पड़ने पर 30 दिन और दिए जा सकते हैं। समूह बनने के छह महीने के भीतर योजना को मंजूरी के लिए देना होगा। मंजूरी के छह महीने के भीतर विकासकर्ता को जमीन का कब्जा दिया जाएगा।

योजना मंजूर होने के बाद 40 फीसदी जमीन विकास प्राधिकरण को दी जाएगी। इसके बाद विकास का काम तीन साल में पूरा करना होगा।

काम पूरा होने के तीन महीने के भीतर जमीन मालिकों को नए भूखंड का कब्जा देना होगा। पूरी योजना पांच साल से ज्यादा नहीं चलेगी।
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