श्रीनगर। लेखक, इतिहास के पुनर्लेखन पर विचार करें ताकि अतीत में विकृत तथ्यों को सही किया जा सके। नई पीढ़ी को यह बताना होगा कि हमारी सभ्यता न सिर्फ आर्थिक रूप से समृद्ध थी बल्कि साहित्य, विज्ञान और अध्यात्म का वैश्विक केंद्र भी थी। प्राचीन भारत विश्व सभ्यता और संस्कृति का वाहक था। हमने दुनिया को विज्ञान, गणित और चिकित्सा का उपहार दिया और हमें अपनी सांस्कृतिक, साहित्यिक, वैज्ञानिक और आध्यात्मिक विरासत पर गर्व होना चाहिए।
यह बातें उपराज्यपाल मनोज सिन्हा नेे कही। वह शनिवार को एसकेआईसीसी में नेशनल बुक ट्रस्ट इंडिया द्वारा आयोजित नौ दिवसीय ‘चिनार पुस्तक महोत्सव’ का केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के साथ उद्घाटन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हमारे ज्ञान-विज्ञान की जड़ें हमेशा से ही अपार रही हैं। हमें औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त होने की आवश्यकता है। नई पीढ़ी को यह बताना होगा कि हमारी विरासत दुनिया में अग्रणी रही है। हमने पूरी मानवता को विज्ञान का जो उपहार दिया है वह अतुलनीय है।
एलजी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आर्थिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक पुनर्जागरण का एक साथ साक्षी बन रहा है। राष्ट्र की आध्यात्मिक, सामाजिक और भावनात्मक एकता को सुदृढ़ करने के लिए लेखकों और विचारकों का अद्वितीय योगदान आवश्यक है। भारत की प्राचीन ज्ञान प्रणाली को पुनर्जीवित करने और इसे मुख्यधारा की शिक्षा का हिस्सा बनाने पर ज़ोर दिया। उन्होंने नेशनल बुक ट्रस्ट से नीलमत पुराण, राजतरंगिणी और कथा सरित सागर का विभिन्न भारतीय भाषाओं में प्रकाशन और अनुवाद करने को कहा।
बोले, क्षेत्रीय भाषाओं में इन संस्करणों को अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक महोत्सवों में भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाना चाहिए ताकि दुनिया को जम्मू-कश्मीर की अनूठी साहित्यिक विरासत से परिचित कराया जा सके। कश्मीरी, पहाड़ी, गोजरी, डोगरी, उर्दू और पंजाबी के प्रसिद्ध साहित्य को सक्रिय रूप से बढ़ावा देने और दर्शकों तक पहुंचने के लिए विभिन्न भाषाओं में उनका अनुवाद सुनिश्चित होना चाहिए।
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किताबें दुनिया के लिए खिड़की खोलती हैं
एलजी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और नेशनल बुक डिपो को पाठकों को नए विचारों और दृष्टिकोणों से परिचित होने, देश भर के प्रख्यात लेखकों और विद्वानों के साथ बातचीत करने का अवसर प्रदान करने के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा किताबें दुनिया के लिए खिड़की खोलती हैं। किताबें नए विचार और नए दृष्टिकोण प्रदान करती हैं जो चीजों को देखने के हमारे तरीके को बदल देती हैं। आलोचनात्मक सोच को बढ़ावा देती हैं। चिनार पुस्तक महोत्सव नई पीढ़ी को हमारी अनमोल साहित्यिक विरासत से जोड़ेगा। उन्हें हमारे पूर्वजों द्वारा छोड़े गए पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित और बढ़ावा देने के लिए प्रेरित करेगा।
‘शारदाक्षरी’ और ‘जम्मू-कश्मीर और लद्दाख-युगों से’ का हुआ विमोचन
महोत्सव में शारदा वर्णमाला की प्रथम राष्ट्रीय प्रदर्शनी ‘शारदाक्षरी’ और ‘जम्मू-कश्मीर और लद्दाख-युगों से’ पुस्तक के कश्मीरी अनुवाद का विमोचन भी हुआ। राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय अमृत काल कहानी लेखन प्रतियोगिता के विजेताओं की घोषणा भी की गई। इस दौरान प्रो. मिलिंद सुधाकर मराठे अध्यक्ष राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, विजय कुमार बिधूड़ी संभागीय आयुक्त कश्मीर, प्रो. रघुवेंद्र तंवर अध्यक्ष भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद (आईसीएचआर), डॉ. अमित वांचू मुख्य संयोजक चिनार पुस्तक महोत्सव, युवराज मलिक निदेशक राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, प्रख्यात साहित्यकार, पुस्तक प्रेमी, युवा और बड़ी संख्या में बच्चे उपस्थित थे।
कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद के साथ मिर्जा गालिब भी बढ़ा रहे हैं महोत्सव की शोभा
नौ दिवसीय चिनार पुस्तक महोत्सव में कुल 127 स्टॉल पर 113 प्रकाशकों की विभिन्न विषयों पर पुस्तकें उपलब्ध हैं। महोत्सव में बच्चों से संबंधित ‘चिल्ड्रेन बुक ट्रस्ट नई दिल्ली’ के स्टॉल पर काफी संख्या में ज्ञानोपयोगी पुस्तकें मौजूद हैं। उर्दू भाषा के दर्जनों प्रकाशकों ने स्टॉल सजा रखा है तो कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद और मिर्जा गालिब भी महोत्सव की शोभा बढ़ा रहे हैं। नेशनल बुक ट्रस्ट इंडिया के स्टॉल पर विभिन्न विषयों की किताबें मौजूद हैं तो बगल में ही ‘राष्ट्रीय ई पुस्तकालय’ का काउंटर डिजिटल लर्निंग को बढ़ावा दे रहा है। प्रख्यात रामपुर रजा लाइब्रेरी एवं म्यूजियम का स्टॉल लगा है तो राधा स्वामी सत्संग, नावेल्टी बुक स्टोर, भारतीय पुरातत्व विभाग, नीलकमल पब्लिकेशन, पदम, निखिल, युसूफी पब्लिकेशन, एनके बुक पब्लिकेशन, ज्ञान बुक, मकता बातूल मदीना गुजरात, इल्म स्टोर इन महाराष्ट्र, उर्दू एकेडमी दिल्ली, मध्य प्रदेश उर्दू एकेडमी मध्य प्रदेश और हीरा बुक डिपो लखनऊ ने भी अपनी किताबों की दुकान सजा रखी है।
‘नो योर आर्मी’ और इंडियन रेलवे के भी स्टॉल
पुस्तक महोत्सव में आर्मी स्कूल जम्मू-कश्मीर ने भारतीय सेना के बारे में लोगों की जिज्ञासा शांत करने के लिए ‘नो योर आर्मी’ और विश्व के सबसे ऊंचे रेल ब्रिज चेनाब से जुड़ी उत्सुकता को पूरा करने के लिए रेलवे ने भी ‘इंडियन रेलवे एंड भारतीय रेल मैंगजीन’ नाम से स्टॉल लगा रखा है। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर जेके एकेडमी ऑफ आर्ट कल्चरल एंड लैंग्वेज, जेके बोर्ड एजुकेशन, जेके बैंक आदि ने भी काउंटर खोल रखा है।