एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने प्रतिवादी को निर्देश दिए कि यदि संभव हो तो करेंसी नोटों और इंडियन पोस्टल आर्डर पर डोगरी भाषा का भी उपयोग करने के आग्रह पर विचार किया जाए।
मुख्य न्यायाधीश एन पाल वसंथाकुमार और न्यायाधीश बंसी लाल भट की खंडपीठ ने एडवोकेट बीआर मन्हास की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि यदि यह संभव हो तो चार सप्ताह के अंदर आवश्यक कार्यवाही की जाए।
कई वकीलों की दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने कहा कि भारत विभिन्न भाषाओं का देश है और संविधान जनता को अपनी भाषा उपयोग करने का अधिकार देता है। यही कारण है कि विभिन्नता में अखंडता देश की खूबसूरती है।