राज्यपाल एनएन वोहरा ने गणतंत्र दिवस पर अपने संदेश में टकराव की नीति छोड़ अमन की राह अपनाने पर जोर दिया है। देश की आजादी के संघर्ष और अब तक के सफर में हासिल उपलब्धियों के साथ ही राज्यपाल ने कश्मीर के हालात को लेकर नजरिया बदलने का सुझाव दिया।
उन्होंने कहा, वह पिछले कई वर्षों से लगातार कह रहे हैं कि समस्याओं का हल करने के लिए टकराव की रणनीति से हालात और बिगड़ रहे हैं। सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, राजनीतिक और अन्य संगठनाें को अपने रवैये और नजरिए दोनों में बदलाव लाना होगा। उन्होंने कहा, घाटी के अवाम की समस्याओं का हल हड़ताल और प्रदर्शन से नहीं है, बल्कि इससे अवाम को ही नुकसान है और रियासत पिछड़ती जा रही है।
राज्यपाल ने कहा, भरोसे की खाई को पाटना होगा और हिंसा के चक्र को तत्काल रोकना होगा। अमन के बिना रियासत की तरक्की नहीं हो पा रही है। शिक्षा के क्षेत्र का जिक्र करते हुए राज्यपाल ने कहा, घाटी में 14 लाख स्कूली बच्चों और लगभग एक लाख कॉलेज-युनिवर्सिटी के विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है, जबकि यही युवा रियासत की सबसे बड़ी ताकत हैं।
रियासत में तरक्की के लिए 80 हजार करोड़ के पैकेज के अलावा आधारभूत ढांचा विकसित करने के लिए बड़े पैमाने की फंडिंग हुई है। राज्य सरकार ने बेरोजगार की चुनौती से निपटने के लिए 2500 करोड़ के प्रस्ताव मंजूर किए हैं। ऐसे में अब सभी को मिलकर अमन और तरक्की की राह मजबूत करनी होगी।