अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। पाॅलिथीन पर प्रतिबंध के बाद अब नगर निगम कंपोस्टेबल कैरी बैग बाजार में उतारेगा। जून से लोगों को ये बैग मुहैया करवाए जाएंगे। इनकी खासियत यह है कि प्रयोग के बाद बेकार बैग से खाद बनाई जा सकेगी। इससे पर्यावरण पर वितरित असर नहीं पड़ेगा।
मौजूदा समय में पाॅलिथीन से प्रदूषण बढ़ रहा है। रोजाना शहर से इकट्ठा किया जा रहा 200 मीट्रिक टन पाॅलीथीन ठिकाने लगाना मुश्किल हो रहा है। अब नगर निगम ने पाॅलिथीन बंद कर कपड़े के थैलों के साथ कंपोस्टेबल कैरी बैग को विकल्प चुना है। बाजार मेंं आसानी से ये बैग उपलब्ध होंगे। इससे लोग आसानी से अपनी जरूरत का सामान खरीद सकेंगे।
इस बैग को मिट्टी में दबाने पर यह खाद के रूप में तब्दील हो जाता है। इसकी खाद का इस्तेमाल पौधों और अन्य प्रकार की फसलों में किया जा सकता है। बैग में फल-सब्जी, घर का अन्य सामान लाने के साथ खाना भी पैक किया जा सकेगा। इसको इस्तेमाल करने के बाद बेकार होने पर इसे डंपिंग ग्राउंड या मिट्टी में दबाने पर तीन से छह माह के भीतर खाद तैयार हो जाएगी। इसे बेचकर नगर निगम की आय में भी इजाफा होगा।
300 रुपये प्रति किलो का मिलेगा पैकेट
अलग-अलग साइज के कंपोस्टेबल बैग की कीमत 300 रुपये प्रति किलो पैकेट होगी। यह पाॅलिथीन बैग से हलका होगा। इसमें सामान आराम से एक जगह से दूसरी जगह पर पहुंचाया जा सकेगा।
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नगर निगम कंपोस्टेबल कैरी बैग लोगों को मुहैया करवाएगा। इससे खाद बनाई जा सकेगी और आय अर्जित होगी। जून माह से ये बैग लोगों को मुहैया करवाने पर काम शुरू होगा।
- राजिंदर शर्मा, मेयर
क्या है कंपोस्टेबल बैग... कंपोस्टेबल बैग स्टार्च पौधे से बने होते हैं और किसी भी जहरीले पदार्थ का उत्पादन नहीं करते हैं। खाद बनाने के लिए माइक्रोबियल गतिविधि के माध्यम से कंपोस्टेबल बैग एक कंपोस्टिंग सिस्टम में आसानी से टूट जाते हैं। विशेष परिस्थितियों में ये बैग 10-45 दिनों के भीतर सड़ जाते हैं।