परिसीमन आयोग के सदस्य प्रदेश के चार दिवसीय दौरे पर श्रीनगर पहुंच चुके हैं। आयोग जम्मू और कश्मीर दोनों संभाग में 200 से ज्यादा प्रतिनिधिमंडलों से मिलेगा। आयोग के जम्मू-कश्मीर दौरे से ठीक पहले पीएजीडी(पीपुल्स अलायन्स फॉर गुपकार डिक्लेरेशन) के दो क्षेत्रीय राजनीतिक दलों ने अलग-अलग रास्ते चुने हैं। एक तरफ नेकां ने घोषणा की है कि पांच सदस्यीय टीम आयोग से मिलेगी, जबकि पीडीपी आयोग से नहीं मिलेगी। बता दें कि महबूबा मुफ्ती की पीडीपी को छोड़कर प्रदेश में पंजीकृत शेष 11 दलों ने परिसीमन प्रक्रिया में शामिल होने पर सहमति जता दी है। इनमें नेकां के अलावा भाजपा, कांग्रेस, पैंथर्स पार्टी, अपनी पार्टी, पीपुल्स कांफ्रेंस, बहुजन समाज पार्टी प्रमुख हैं। कई संगठनों ने भी आयोग से मिलने का समय लिया है। आयोग के दौरे को देखते हुए सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं।
परिसीमन आयोग की टीम से मुलाकात के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गुलाम अहमद मीर ने कहा 'हमने आयोग से कहा कि देश भर में परिसीमन प्रक्रिया को 2026 तक रोक दिया गया है, लेकिन जम्मू-कश्मीर के लिए इस वर्ष को चुना गया है, आखिर ऐसा क्यों किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी अब जम्मू-कश्मीर के लिए अलग व्यवस्था बना रही है। जब तक अनुच्छेद-370 और 35-ए की बहाली नहीं हो जाती, तब तक इस तरह की कवायद से जम्मू-कश्मीर के लोगों को कोई मदद नहीं मिलेगी। जब तक सरकार हमें परिसीमन की पूरी योजना पेश नहीं करती, तब तक कांग्रेस पार्टी कोई सुझाव नहीं देगी। 5 अगस्त 2019 को हुआ फैसला असंवैधानिक हैं।'
नेशनल कांफ्रेंस के नेता नासिर असलम ने कहा कि हमने उन्हें बताया कि 2019 का पुनर्गठन अधिनियम असंवैधानिक है। हमने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। आयोग को इस पर सुप्रीम कोर्ट के नतीजे का इंतजार करना चाहिए था। 2026 तक अगर देश में परिसीमन नहीं हो रहा है तो जम्मू-कश्मीर में ही क्यों। हमने उनसे कहा कि लोगों को केंद्र सरकार पर विश्वास नहीं रहा है। आयोग को विश्वास बहाल करने और पारदर्शी तरीके से कोशिश करनी चाहिए। परिसीमन का मुख्य मानदंड जनसंख्या के अनुसार प्रक्रिया शुरू करना है।
उधर, गुलाम नबी मलिक, सीपीआई(एम) महासचिव ने कहा कि हमने अपनी आशंकाओं के बारे में बात की। हमने आयोग की टीम से कहा कि आपकी रिपोर्ट को लोगों को जोड़ना चाहिए न कि बांटना चाहिए। हमने उन्हें बताया कि 5 अगस्त का फैसला असंवैधानिक है लेकिन उन्होंने जवाब दिया कि हमें इससे कोई लेना-देना नहीं है।
वहीं, भाजपा नेता अल्ताफ ठाकुर ने कहा कि हमने उनको (आयोग) बताया कि प्रदेश में कुछ ऐसे निर्वाचन क्षेत्र हैं जिनका एक हिस्सा एक जिले तो दूसरा हिस्सा दूसरे जिले में है। निर्वाचन क्षेत्र एक ही जिले में होना चाहिए। इसके साथ ही अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या के हिसाब से आठ-नौ विधानसभा सीटें होनी चाहिए। अल्ताफ ठाकुर ने कहा कि 1995 में हुआ परिसीमन दो परिवारों को फायदा पहुंचाने के लिए हुआ था।
पीडीपी के परिसीमन प्रक्रिया में न शामिल होने के सवाल के जवाब में अल्ताफ ने कहा कि वो पार्टी अपनी बात पर ही कायम नहीं रहती है। सर्वदलीय बैठक में इन्होंने जल्द से जल्द चुनाव कराए जाने की मांग की थी। लेकिन दिल्ली से वापस आने के बाद पीडीपी इस बात से पलट गई।
परिसीमन आयोग के दौरे को लेकर पीडीपी मुखिया महबूबा मुफ्ती ने एक पत्र जारी किया है। जिसमें उन्होंने लिखा है कि पीडीपी परिसीमन आयोग को यह पत्र भेज रही है। लोगों की पीड़ा को कम करने के लिए कोई आधारभूत कार्य नहीं किया गया है। राजनीतिक गतिविधि के लिए कोई विश्वसनीय कदम नहीं उठाए गए हैं। जिसको देखते हुए परिसीमन आयोग की बैठक में पीडीपी शामिल नहीं होगी। पीडीपी महासचिव जीएन हंजुरा द्वारा हस्ताक्षरित पत्र में जम्मू-कश्मीर के लोगों के हितों को ठेस पहुंचाने के लिए परिसीमन आयोग के अभ्यास को पूर्व नियोजित होने का आरोप लगाया गया है।
आयोग की अध्यक्ष जस्टिस (सेवानिवृत्त) रंजना देसाई को लिखे गए पत्र में पीडीपी ने कहा कि 5 अगस्त 2019 को संवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों को कुचल दिया गया। जम्मू-कश्मीर के लोगों से उनके अधिकार छीन लिए गए। जिसका क्रम अभी भी जारी है। देश भर में परिसीमन प्रक्रिया को 2026 तक रोक दिया गया है लेकिन जम्मू-कश्मीर अपवाद बना दिया गया है।
बैठक स्थल और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई
इस बीच बैठक स्थल और आसपास के इलाकों में सुरक्षा कवच को कड़ा कर दिया गया है। संवेदनशील इलाकों में सुरक्षाबलों की गई है। साथ ही शहर में कई जगहों पर नाके भी लगाए गए हैं। डल झील में सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के वॉटर विंग की तैनाती की गई है। कोई अप्रिय घटना न घटे इसके लिए खुफिया विभाग के जवानो को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
आयोग की टीम में आयोग की अध्यक्ष जस्टिस (सेवानिवृत्त) रंजना देसाई, मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्र व राज्य चुनाव आयुक्त केके शर्मा शामिल हैं। कश्मीर में दो दिनों तक आयोग से 60 प्रतिनिधिमंडल मिलेंगे। इनमें श्रीनगर में 43 व पहलगाम में 17 शामिल हैं।