रविवार को करीब दस मिनट की इस मुलाकात का एजेंडा तो सार्वजनिक नहीं था, लेकिन कयास लगाए जा रहे हैं कि बिजनेस नियमों पर चर्चा हुई है। नेकां सरकार ने जम्मू-कश्मीर के लिए प्रस्तावित बिजनेस नियमों को मंजूरी के लिए उपराज्यपाल के पास भेजा है। कैबिनेट ने इसे मंजूरी दी है, लेकिन राजभवन से अभी तक मंजूरी नहीं मिली है। बिजनेस नियमों के परिभाषित होने से निर्वाचित सरकार और उपराज्यपाल के कार्यालय के बीच शक्तियों के विभाजन की रूपरेखा तैयार होने की उम्मीद है।
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री का राजभवन दौरा पूर्व निर्धारित नहीं था। इस अचानक हुई मुलाकात ने प्रदेश बिजनेस नियम के बारे में अटकलों को तेज किया है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने छह मार्च को घोषणा की थी, सरकार ने केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासन के लिए बिजनेस नियमों को तय किया है। वहीं विधानसभा सत्र में उपराज्यपाल पर सीधे हमले भी हुए हैं। नेकां के विधायकों ने प्रदेश में बढ़ते अवैध खनन, जल जीवन मिशन में घोटाले का आरोप लगाया है।
उपराज्यपाल के पांच साल के कार्यकाल में प्रदेश की तबाही होने तक की बातें भी विधानसभा में कही गई हैं। राजनीतिक विशेषज्ञ तो जल जीवन मिशन में घोटाले के आरोप के लिए बनाई हाउस समिति को उपराज्यपाल के शासनकाल में हुए कार्यों से जोड़कर देख रहे हैं। उनका मानना है कि अगर इसमें जांच होगी और कुछ अनियमितताएं मिलती हैं तो उसका सारा ठीकरा उपराज्यपाल पर ही फोड़ा जाएगा।