ग्लेशियरों की गति दर में भी दर्ज की गई कमी
लद्दाख के दो ग्लेशियरों पर हुए अध्ययन में झील और जमीन पर खत्म होने वाले ग्लेशियरों की बहाव दर में क्रमशः 66 और 47 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। वैज्ञानिकों ने अलग-अलग तकनीकों का इस्तेमाल कर ग्लेशियर के द्रव्यमान (वर्ष 2000 से 2021 तक) का अध्ययन किया और पाया कि पदम व नेटियो नाला ग्लेशियरों के लिए यह क्रमशः -0.22 ± 0.07 और -0.52 ± 0.07 मीटर प्रतिवर्ष था। इससे झील पर खत्म होने वाले ग्लेशियरों के अत्यधिक प्रतिक्रियाशील होने की बात साबित हुई।
प्रो-ग्लेशियर झील के प्रभाव को समझने के लिए अध्ययन :
ग्लेशियर की स्थिरता पर प्रो-ग्लेशियर झील के प्रभाव और इसके द्रव्यमान को प्रभावित करने वाले कारकों को बेहतर ढंग से समझने के लिए वैज्ञानिकों ने पदम और नेटियो नाला ग्लेशियर से सटे हिस्से पर शोध किया। ये वो जगह थीं जहां से ग्लेशियर पीछे हट चुका था। उन्होंने पाया कि ग्लेशियर के अंतिम छोर का हिमनद से संपर्क होने पर ग्लेशियर अधिक तेजी से पीछे हटा है।
1993 से लेकर 2022 तक के आंकड़ों का किया विश्लेषण :
वैज्ञानिकों ने बेहतर नतीजे के लिए वर्ष 1993 से 2022 तक के जगह छोड़ चुके ग्लेशियरों पर अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि पदम और नेटियो नाला ग्लेशियरों का क्षेत्रफल क्रमशः 28.61 से घटकर 25.29 वर्ग किलोमीटर और 29.79 से घटकर 28.20 वर्ग किलोमीटर हो गया। इसी अवधि में झील पर खत्म होने वाला ग्लेशियर पीछे हटा। 29 साल की इस अवधि में प्रो-ग्लेशियर झील के क्षेत्रफल में 0.35 से 0.56 वर्ग किलोमीटर तक की स्पष्ट वृद्धि देखी गई।