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खतरे में आया प्राचीन वजीरों की बावली का अस्तित्व

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रियासी। नगर के वार्ड-13 रूपनगर में स्थित प्राचीन प्राकृतिक बावली का अस्तित्व खतरे में है। वजीरों की बावली के नाम से जानी जाने वाली इस प्राकृतिक बावली की देखरेख नहीं की गई, तो आने वाले समय में लोगों को इसका फायदा मिलना बंद हो जाएगा। रियासत के महाराजा गुलाब सिंह के राज के दौरान बनाई गई बावली का पानी दिन प्रतिदिन गंदा व दूषित होता जा रहा है। बताया जाता है कि मोहल्ले के साथ ही नगर के कई स्थानों से लोग बावली पर नहाने आते हैं। इसके अलावा लोग बावली में कपड़े आदि धोने भी आते हैं। इससे बावली का पानी दूषित होता जा रहा है।
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गौरतलब है कि, इस प्राचीन बावली पर महान योद्घा जनरल जोरावर सिंह सुबह स्नान और सूर्य नमस्कार करने आते थे। जनरल जोरावर सिंह को भीमगढ़ किले की देखरेख का जिम्मा दिया गया था। प्राकृतिक बावली किले के पीछे स्थित है, जहां अब मोहल्ला बस गया है। जनरल जोरावर सिंह की पर पौत्री दीक्षा कलहुरिया ने जिला प्रशासन तथा पर्यटन विभाग से बावली का सरंक्षण कर इसे साफ कराने की अपील की है। इस के साथ ही बावली को पर्यटन मानचित्र में लाने की मांग रखी है ताकि बाहरी इलाकों से आने वाले लोग इससे जुड़े इतिहास के बारे में जान सकें।
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