इन वाहन दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण बदहाल सड़कें, ओवरलोडिंग और बदहाल पुराने वाहन हैं। चिनाब वादी में ज्यादातर सड़कों की हालत बुरी तरह से खराब है। इन सड़कों पर वाहनों को चलाना किसी खतरे से खाली नहीं है। बदहाल मार्ग पर मेटाडोर व बस चालक चलने से इंकार कर देते हैं। मजबूरन एआरटीओ को छोटे वाहनों को परमिट देना पड़ता है। सड़कें इतनी ज्यादा खराब होती है कि कई बार छोटे वाहनों को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है और वाहन दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं।
करीब 30 वर्षों से सड़कों की नहीं सुधारी गई है हालत
चिनाब की वादी में कई सड़कें ऐसी मौजूद हैं, जिन पर करीब 30 वर्ष से तारकोल नहीं डाला गया। किसी ने भी इनके रख रखाव की तरफ ध्यान नहीं दिया। रख रखाव के अभाव में सड़कें बदहाल होती चली गईं। आए दिन इन पर वाहन दुर्घटना का शिकार होते हैं।
दूर दराज ग्रामीण इलाकों के रूट पर आज भी यात्री वाहनों की कमी को दूर नहीं किया जा सका है। यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी हो चुकी है, लेकिन यात्री वाहन आज भी कम ही हैं। इसी का नतीजा है कि वाहन ओवरलोड होकर चलते है। समय पर अपनी मंजिल पर पहुंचने की जल्दवादी में यात्री भी परवाह किए बिना ओवरलोड वाहनों पर बैठने को मजबूर होते हैं। कई बार ओवरलोड होने के कारण चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख पाता है और बड़ी दुर्घटना हो जाती है।
फिटनेस प्रमाण पत्र लेकर चल रहे जर्जर वाहन
दूर दराज ग्रामीण इलाकों में चलने वाले यात्री वाहन पुराने माडल के भी हैं। इनकी हालत बहुत ज्यादा खराब है। इनको मरम्मत कर चलवाया जाता है। जांच के बाद एआरटीओ से फिटनेस प्रमाण पत्र भी मिलता है। फिटनेस प्रमाण पत्र मिलने के बाद ही इनको यात्रियों का आवाजाही करने की अनुमति मिलती है। किश्तवाड़, डोडा, भद्रवाह में काफी संख्या में पुराने यात्री वाहन चलते हैं, लेकिन कई बार यह वाहन इतने दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं।