सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त, जवान तैनात
19 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चिनाब पुल को देश को समर्पित करेंगे। इसी पुल से वंदेभारत ट्रेन श्रीनगर तक जाएगी। चिनाब पुल तीन स्तरीय सुरक्षा घेरे में है। जीआरपी, आरपीएफ के साथ ही नाइट विजन तकनीकी से लैस सीसीटीवी कैमरों की चप्पे-चप्पे पर नजर है। जीआरपी के जवानों की नियमित गश्त हो रही है। पीएम को दौरे को देखते हुए 20 से अधिक सुरक्षा एजेंसियों की पुल सहित कटड़ा से श्रीनगर तक निगरानी है।
चिनाब पुल के आर्च में डाला गया कंक्रीट : हिमांशु शेखर उपाध्याय
उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक 272 किमी लंबी है। हिमालय की भौगोलिक चुनौती के बीच इस रेल लिंक में रेल ट्रेक बिछाना बड़ी चुनौती थी। कुल लंबाई में 119 किलोमीटर की लंबाई के 36 टन और छाटे- बड़े एक हजार के करीब पुल है। इस पुरी सेक्शन में सुरक्षा को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी गई है। चिनाब पुल के आर्च में कंक्रीट डाला गया है, यह तकनीक देश में पहली बार इस्तेमाल की है जिससे पुल को मजबूती मिलेगी।
मुख्य जनसंपर्क अधिकारी हिमांशु शेखर उपाध्याय ने कहा कि प्रधानमंत्री के कब कटड़ा-बनिहाल तक ट्रेन का हरी झंडी दिखाकर रवाना करेगी, इसकी रेलवे के पास अभी तक अधिकारिक जानकारी नहीं है, लेकिन हमें अपनी तैयारियों को पुख्ता कर रहा है। उन्होंने कहा कि रियासी जिले के चिनाब नदी पर बना चिनाब पुल नया भारत की इच्छाशक्ति का परिणाम है।
यह भारतवासियों के लिए गर्व की बात की है। यह दुनिया का सबसे ऊंचा आर्च पुल है। इसको बनाने में 30 हजार मीट्रिक टन स्टील का उपयोग हुआ है। 70 हजार क्यूबिक मीटर से ज्यादा कंक्रीट का उपयोग किया है। यह पुल 250 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से चलने वाली हवाओं को झेलने में समक्ष है। इतना बड़े आर्च पुल बनाने की कोई भी देश हिम्मत नहीं करता है, लेकिन हमारे इंजीनियर ने इस सच किया।
उन्होंने कहा कि 1994-95 में इस पुल के निर्माण को स्वीकृति मिली थी। उन्होंने कहा कि अभी तक श्रीनगर तक चलने वाली विशेष वंदे भारत की दो रैक हमें मिली हैं जिनका परिचालन कटड़ा-बनिहाल तक चलाया जाएगा। टनल की सुरक्षा को विशेष ध्यान दिया गया है। सीसीटीवी से निगरानी को पुख्ता किया है। टनल के साथ एस्केप टनल बनाए है। टनल में गैस न बने इसके लिए एक्जास्ट फैन लगाए है। कंट्रोल रूम बनाए हैं।