हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एन पाल वसंथाकुमार और जस्टिस हसनैन मसूदी की खंडपीठ ने ऐतिहासिक फैसले में कानून एवं संसदीय मामलों के सचिव को निर्देश दिए कि चार सप्ताह के अंदर राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति की जाए।
उक्त निर्देश जम्मू कश्मीर पीपुल्स फोरम की ओर से दायर एक जनहित याचिका पर दिया, जिसमें कहा गया कि 29 जून 2014 से मानवाधिकार आयोग पूरी तरह ठप पड़ा है, क्योंकि सरकार किसी न किसी कारण से उसके चेयरमैन और सदस्यों की नियुक्ति करने में विफल रही है। याचिका में अपील की गई कि सरकार को निर्देश दिए जाएं कि तत्काल नियुक्तियां की जाएं।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने पाया कि राज्य विधायिका ने एसआरओ-1 (एक जनवरी 1999) जारी कर आयोग को अधिनियमित किया था, ताकि मानवाधिकार की सुरक्षा हो सके।
अधिनियम के अनुसार मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, विधानपरिषद के चेयरमैन, गृह मंत्री, विधानसभा और विधानपरिषद में विपक्ष के नेता से युक्त कमेटी आयोग के चेयरमैन व सदस्यों की नियुक्ति करेंगे।