संभाग के सबसे बड़े अस्पताल जीएमसी की तीसरी नजर काम नहीं कर रही है। अस्पताल के महत्वपूर्ण यूनिटों की पहरेदारी के लिए 16 क्लोज सर्किट टेलीविजन कैमरे (सीसीटीवी) लगाए गए थे, लेकिन मौजूदा समय में आधे से ज्यादा बंद पड़े हैं। नतीजतन, अस्पताल में स्टाफ-तीमारदारों में कहासुनी, चोरियों को रोकने और असामाजिक तत्वों पर नजर नहीं रखी जा पा रही है।
कुछ साल पहले जीएमसी में सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए सीसीटीवी लगाए गए थे। इसका उद्देश्य असामाजिक गतिविधियों पर नजर रखना था, लेकिन समय के साथ कैमरों की मरम्मत का काम ढीला पड़ता गया। सूत्रों के अनुसार अस्पताल में 12 कैमरे बंद पड़े हैं। इनमें आधे से अधिक इमरजेंसी में हैं।
इसके अलावा प्रिंसिपल कॉरिडोर, अधीक्षक कॉरिडोर, ओपीडी कांप्लेक्स के भीतर और बाहर, इमरजेंसी के भीतर और बाहर सीसीटीवी लगाए गए हैं। इनमें अधिकांश सीसीटीवी के बंद पड़ जाने से किसी भी गतिविधि पर नजर नहीं रखी जा पा रही है।
कुछ साल पहले बम की अफवाह से अस्पताल में बम निरोधक दस्ते ने पूरा अस्पताल खंगाला था, लेकिन कोई विस्फोटक पदार्थ नहीं मिला था। इसमें डॉग स्क्वायड की भी मदद ली गई थी। इस घटना को गंभीरता से लेते हुए अस्पताल प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता बनाने के लिए सीसीटीवी का सहारा लिया था।
अस्पताल में सीसीटीवी की प्रिंसिपल कार्यालय, प्रशासक कार्यालय और कंट्रोल रूम से मानिटरिंग होती है। उल्लेखनीय है कि जीएमसी की खासकर इमरजेंसी में स्टाफ और डाक्टरों के बीच कई बार मारपीट और कहासुनी की घटनाएं हो चुकी हैं।