जम्मू-कश्मीर के बहुचर्चित 25 हजार करोड़ रुपये के रोशनी एक्ट घोटाले की जांच अब सीबीआई करेगी। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस गीता मित्तल और जस्टिस राजेश बिंदल की खंडपीठ ने यह आदेश देते हुए रोशनी एक्ट को असांविधानिक करार दिया। साथ ही इस एक्ट के तहत दी गई जमीन के आदेशों को भी निष्प्रभावी कर दिया। बता दें कि रोशनी एक्ट के तहत प्रदेश की 20 लाख कनाल सरकारी जमीन लोगों को कौड़ियों के भाव दे दी गई थी।
खंडपीठ ने शुक्रवार को मामले की सुनवाई के बाद कहा कि सीबीआई को हर आठ हफ्ते में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। जांच प्रभावित न हो, इसके लिए प्रदेश के मुख्य सचिव की जवाबदेही तय की गई है। जिन अधिकारियों के कार्यकाल के दौरान यह घोटाला हुआ, उनके खिलाफ भी जांच होगी। एडवोकेट अंकुर शर्मा ने वर्ष 2014 में इस एक्ट को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए इसे निरस्त करने की मांग की थी।
हाईकोर्ट ने कई माह सुनवाई करने के बाद 23 सितंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस घोटाले में अफसरों, नेताओं, माफियाओं, कारोबारियों, मंत्रियों और विधायकों के नाम इस घोटाले में सामने आएंगे। हाईकोर्ट ने एक्ट को 2018 में निरस्त करने के बाद मामले की जांच प्रदेश के एंटी करप्शन ब्यूरो को दी गई थी, लेकिन प्रभावी लोगों के दबाव में एसीबी इसकी जांच ठीक से नहीं कर रहा था। जेएनएफ
ऐसे किया गया घोटाला
वर्ष 2001 में नेशनल कांफ्रेंस सरकार ने रोशनी एक्ट बनाया। इससे जमा होने वाले राजस्व को बिजली परियोजना पर लगाने का तर्क दिया गया था। एक्ट का प्रावधान था कि उन्हीं लोगों को जमीन का मालिकाना हक मिलेगा, जिनके पास 1999 से पहले से सरकारी जमीनों पर कब्जा है। वर्ष 2004 में इस एक्ट में बदलाव कर वर्ष 1999 से पहले कब्जे की शर्त हटा दी गई। इससे लोगों ने सरकारी जमीन पर कब्जे को दर्शाकर आवेदन किए। कई लोगों ने 200 रुपये में एक कनाल जमीन पर मालिकाना हक पा लिया। एक्ट के तहत मूल्य तय करने के लिए कई कमेटियां बनीं, लेकिन इसमें भी नियमों को ताक पर रखा गया। 2007 के बाद मालिकाना हक के लिए आवेदन नहीं हो सकता था, लेकिन राजनेताओं ने यह जारी रखा।