बहुचर्चित फर्जी गन लाइसेंस मामले में सीबीआई ने दो अफसरों आईएएस राजीव रंजन और कुपवाड़ा के डीसी (सेवानिवृत्त) केएएस इतरत हुसैन रफीकी को सोमवार को कश्मीर की सीबीआई अदालत में पेश किया गया। जहां सीबीआई ने दलील दी कि दोनों से मामले में और खुलासा करना है। दलील के बाद अदालत ने दोनों को दस-दस दिन के रिमांड पर भेज दिया। फिलहाल, दोनों को अभी कश्मीर में रखा गया है। रिमांड के दौरान दोनों से पूछताछ होगी कि अब तक कितनों को फर्जी लाइसेंस जारी किए हैं।
सीबीआई राजीव रंजन और इतरत हुसैन से जुड़े सभी दस्तावेजों को खंगाल रही है। सीबीआई ने 2012 से 2016 तक अलग-अलग जिलों के डीसी की ओर से भारी संख्या में हथियार लाइसेंस जारी किए जाने के मामले में मई 2018 में भ्रष्टाचार और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था। जांच में दोनों अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध मिली थी। इसमें भारी मात्रा में पैसे लेकर लाइसेंस जारी करने का भी खुलासा हुआ था।
सीबीआई अब दोनों से लगातार पूछताछ में जुटी हुई है कि अब तक फर्जी कागजात और बिना वेरिफिकेशन के कितने लाइसेंस जारी किए है। सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2016 से 2017 तक कुपवाड़ा में तैनाती के दौरान राजीव रंजन ने करीब 25 हजार आर्म्स लाइसेंस जारी किए हैं। खुलासा होने के बाद कई अधिकारियों के शामिल होने के आरोप भी लगे थे। साथ ही सीबीआई ने पिछले साल दिसंबर में बारामूला, जम्मू, राजोरी, ऊधमपुर, श्रीनगर, शोपियां, कुपवाड़ा, किश्तवाड़, नोएडा, डोडा, समेत गुरुग्राम के 13 ठिकानों पर छापेमारी की थी।
-राजीव रंजन का भाई 2017 में हुआ था गिरफ्तार
फर्जी हथियार लाइसेंस मामले में पुलिस ने वर्ष 2017 में रंजन के भाई ज्योति रंजन को गिरफ्तार कर फर्जी हथियार लाइसेंस जब्त किया था।