पहले प्रति बच्चा वर्दी पर 280 रुपये खर्च किए जाते थे। इस बार 400 रुपये में वर्दी मुहैया करवाई जाएंगी। कंपनियों को अच्छी क्वालिटी का कपड़े का प्रयोग करने को कहा गया है।
यह कदम विभाग ने लगातार घटिया वर्दियों की शिकायत मिलने के बाद उठाया है। विभाग को एक माह में ही वर्दियां फटने की शिकायतें मिल रही थीं। प्रति वर्दी 120 रुपये का खर्च बढ़ने के बाद विभाग को 22 करोड़ 80 लाख रुपये अतिरिक्त खर्च होंगे।
19 लाख बच्चों के लिए कुल 76 करोड़ रुपये से वर्दियों की खरीद की जाएगी। वर्दियां मिलने से गरीब बच्चों को सुविधा मिलेगी। अभिभावकों पर वर्दियां खरीदने का अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।
निदेशक समग्र शिक्षा अभियान अरुण मन्हास ने बताया कि वर्दी खरीद के लिए कंपनियों को डिमांड दे दी है। 76 करोड़ रुपये की राशि वर्दियों पर खर्च की जाएगी। जो पहले की अपेक्षा पहले की अपेक्षा इस बार ज्यादा बजट खर्च किया जाएगा।