10वीं कक्षा की ज्यादातर सभी परीक्षाएं खत्म हो चुकी हैं। परीक्षा का तनाव खत्म होते ही विद्यार्थियों को आगे क्या पढ़ें इसकी दुविधा और करियर की चिंता हो जाती है। कई बार स्टूडेंट्स जोश में साइंस और कॉमर्स ले लेते हैं। लेकिन कुछ समय बाद उन्हें समझ में आता है कि वह इस स्ट्रीम में पढ़ाई नहीं कर पा रहे। काउंसलरों का कहना है कि 10वीं के बाद सोच-समझ कर स्ट्रीम का चयन करना बहुत जरूरी होता है।
विद्यार्थियों के अभिभावक 10वीं के बाद उन पर साइंस और कॉमर्स चुनने का दबाव बनाते हैं। 11वीं के लिए स्ट्रीम स्टूडेंट्स खुद चुनें तो वह लाभदायक साबित होगा। क्योंकि 11वीं में चयन किया सब्जेक्ट करियर तय करने में अहम भूमिका निभाता है।
काउंसलर की सलाह
करियर काउंसलर से बात कर स्ट्रीम चुनें
करियर काउंसलर से बात कर यह तय किया जा सकता है कि विद्यार्थी के फ्यूचर के लिए कौन-सी स्ट्रीम बेस्ट है। जिस स्ट्रीम में स्टूडेंट्स की रुचि होगी, करियर काउंसलर उसी तरह से स्ट्रीम का चयन करने के लिए बताएगा।
बनना क्या चाहते हैं, पहले सोच लें
स्टूडेंट्स के लिए बहुत जरूरी है कि वह अपने दिमाग में सेट कर लें कि उनकी रुचि किस सब्जेक्ट में है और भविष्य में क्या बनना चाहते हैं। उसी हिसाब से आर्ट्स, कॉमर्स या साइंस में से किसी को चुनें।
इसमें तो आगे फ्यूचर ही नहीं
अकसर स्टूडेंट्स की सोच रहती है कि कॉमर्स और साइंस में फ्यूचर अच्छा है, लेकिन आर्ट्स में ऐसा नहीं है। लेकिन यह केवल गलतफहमी है जो ज्यादातर हर स्टूडेंट को रहती है। हर सब्जेक्ट में फ्यूचर है, लेकिन उसके लिए जरूरी है कि ध्यान से सब्जेक्ट को पढ़ा जाए और स्टूडेंट की उसमें रुचि हो।
लोगों की नहीं करें परवाह
किसी स्टूडेंट के अगर 10वीं में 90 प्रतिशत मार्क्स आते हैं तो इसका मतलब यह नहीं कि उसे साइंस और कॉमर्स ही पढ़ना है। किसी के कहने पर सब्जेक्ट का चयन न करें। अगर स्टूडेंट की रुचि आर्ट्स में है तो वह साइंस और कॉमर्स में कैसे पढ़ाई कर पाएगा?