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Jammu News: बिना जीआई टैग देखे नहीं खरीदें पश्मीना शॉल

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10 से दो लाख तक की शॉल उपलब्ध हैं बाजार में
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असली के नाम पर एक रुपये की नकली शॉल न थमा दे को गई

अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। सर्दियों के दस्तक देने के साथ ही बाजार गर्म कपड़ों से सज गए हैं। विश्व प्रसिद्ध पश्मीना शॉल अपनी अनूठी पहचान के कारण ग्राहकों को सबसे ज्यादा आकर्षित कर रही है। चांगथंगी नस्ल की लद्दाखी बकरी के बालों से बनी यह शॉलें 10 हजार से दो लाख रुपये तक में उपलब्ध हैं पर सावधान रहें... खरीदते समय जीआई टैग देखें और जीएसटी वाला पक्का बिल लें। यह किसी भी धोखाधड़ी के मामले में कानूनी कार्रवाई करने में मदद करेगा।
दुकानदार भी सलाह देते हैं कि असली पश्मीना शॉल की पहचान के लिए उस पर लगा जीआई टैग जरूर स्कैन करें। इससे आपको उत्पाद की प्रामाणिकता और पूरा विवरण मिल जाएगा।
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रघुनाथ बाजार में करीब 50 साल से दुकान चला रहे गौतम अवस्थी बताते हैं कि असली-नकली पश्मीना की पहचान करना सामान्य ग्राहक के लिए आसान नहीं है। ये तीन कैटेगरी में बनती हैं। पहली प्लेन जिसमें कोई डिजाइन नहीं होता। दूसरी ब्लॉक प्रिंट (कलमकारी) जिस पर पहले से प्रिंट डिजाइन पर सुई से कढ़ाई की जाती है। तीसरी कोनी है जिस पर लकड़ी की सुई सेे काफी बारीक आकर्षक कढ़ाई की जाती है।

उन्होंने बताया कि प्लेन शॉल की शुरुआती कीमत 10 हजार, कलमकारी की 50 हजार और कोनी की कीमत एक से दो लाख रुपये तक है। इसे चाहे जहां से खरीदें पक्की रसीद जरूर लें

रघुनाथ बाजार में ही करीब 70 साल से गर्म कपड़ों की दुकान कर रहे गौतम गुप्ता और वीरेंद्र कोहली ने कहा कि सिर्फ पश्मीना ही नहीं बल्कि कोई भी सामान खरीदना हो तो विश्वसनीय ब्रांडेड दुकान से ही खरीदें। दुकानदारों ने सरकार से मांग की है कि जीआई टैगिंग की सुविधा जम्मू में भी दी जाए।

न रखें बॉक्स में, घर पर धुलने से बचें
पश्मीना शॉल को बाॅक्स में न रखें क्योंकि कीड़े नुकसान पहुंचा सकते हैं। बेहतर होगा कि इसे हैंगर में टांग कर लोहे की आलमारी मेंं रख दें। संभव हो तो हर महीने धूप भी दें। इसे घर पर धुलने के बजाए ड्राई क्लीनर को दें।

डेढ़ साल तक लग जाते हैं एक पश्मीना शॉल बनाने में
-सामान्य तौर पर एक पश्मीना शॉल बनाने में कई सप्ताह से लेकर कई महीने तक लग सकते हैं। जटिल डिजाइनों वाली शॉल को तैयार होने में एक साल से भी अधिक समय लग सकता है।
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-पारंपरिक चाक पर रोज सात घंटे काम करें तो 100 ग्राम पश्मीना सूत कातने में लगभग एक माह का समय लगता है।

-कोनी शॉल तैयार करने में करीब डेढ़ साल लग जाता है। पूरे हिस्से पर घनी जामावार कढ़ाई में तीन साल तक लग सकते हैं।
-गौतम गुप्ता ने कहा कि सबसे पहले लोहे की छड़ों पर सूत को सुखाने और पिरोने के बाद इसे धोया जाता है। अलग-अलग रंगों में रंगने के बाद इसके धागों को लपेटकर ताना बनाया जाता है।
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