फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jammu News: त्योहारी सीजन लाया कश्मीरी सेब की कीमतों में उछाल, उत्पादकों को राहत

विज्ञापन
विज्ञापन
- दो महीने की सुस्ती के बाद बाजार में लौटी रौनक, देशभर के खरीदारों से बढ़ी मांग
विज्ञापन

- डिलिशियस और कुल्लू डिलिशियस की कीमतों में 25 फीसदी तक की तेजी
- 700 से 1200 रुपये प्रति पेटी तक बिका सेब

अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। दिवाली और शादी के सीजन ने कश्मीर के सेब कारोबार को फिर रफ्तार दे दी है। दो महीने की सुस्ती के बाद घाटी की मंडियों में अब दोबारा रौनक लौट आई है। देश के विभिन्न राज्यों से बढ़ी मांग ने बाजार के भावों को ऊपर पहुंचा दिया है। किसानों और व्यापारियों को उम्मीद है कि यह रुझान आने वाले हफ्तों में और मजबूत होगा।

दक्षिण कश्मीर के शोपियां और उत्तर कश्मीर के सोपोर की थोक मंडियां इन दिनों सेब की खरीद-फरोख्त से गुलजार हैं। डिलिशियस किस्म का सेब अब 700 से 850 रुपये प्रति पेटी बिक रहा है। कुल्लू डिलिशियस की कीमतें 1000 से 1200 रुपये प्रति पेटी तक पहुंच गई हैं।
विज्ञापन

दो हफ्ते पहले यही सेब 500 से 800 रुपये प्रति पेटी तक बिक रहे थे। इस दौरान कीमतों में करीब 25 फीसदी की तेजी आई है। शोपियां मेगा फ्रूट मंडी के अध्यक्ष मोहम्मद अशरफ वानी ने कहा कि दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से खरीदारों की मांग में काफी बढ़ोतरी हुई है। त्योहारी और विवाह सीजन ने सेब की खपत को बढ़ाया है। साथ ही, इस बार सड़क संपर्क बेहतर रहने से ढुलाई में दिक्कत नहीं आई। वानी के अनुसार, इस समय सोपोर मंडी में रोजाना ढाई से तीन लाख पेटी और शोपियां मंडी में डेढ़ से दो लाख पेटी सेब की आवक हो रही है। खरीदारों की मौजूदगी से बाजार में रौनक है और फिलहाल भाव स्थिर बने हुए हैं।
सोपोर के सेब उत्पादक राशिद डार बताते हैं कि अगस्त में जब राष्ट्रीय राजमार्ग बार-बार बंद हो रहा था, तब हमें अच्छा माल भी सस्ते दामों पर बेचना पड़ा। उस वक्त खर्च निकालना मुश्किल हो गया था। अब भाव सुधरने से थोड़ी राहत मिली है, लेकिन ढुलाई और पैकिंग का खर्च बढ़ गया है।




सड़क बंद होने से हुआ था नुकसान
इस साल अगस्त और सितंबर में जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग के बार-बार बंद रहने से सेब कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ था। भूस्खलन और चट्टानें गिरने से सैकड़ों ट्रक रास्ते में फंसे रहे। इससे कई सेब उत्पादकों का माल खराब होने की कगार पर पहुंच गया। व्यापारी मानते हैं कि सेब की कीमतों में यह तेजी केवल दिवाली तक सीमित नहीं रहेगी। आने वाले हफ्तों में विवाह सीजन के कारण मांग और बढ़ सकती है। डार कहते हैं कि अगर मौसम और परिवहन दोनों सामान्य रहे तो नवंबर तक भावों में गिरावट की संभावना नहीं है।
विज्ञापन





कश्मीर से निकलता है देश का 75 फीसदी सेब

कश्मीर भारत के कुल सेब उत्पादन का करीब 75 फीसदी हिस्सा देता है। यहां की बागवानी से तीन लाख से अधिक परिवारों की आजीविका जुड़ी है। घाटी की अर्थव्यवस्था में सेब व्यापार का सालाना कारोबार आठ हजार करोड़ रुपये से अधिक का माना जाता है। बीते महीनों में मौसम और सड़क संपर्क सुधरने से सेब की ढुलाई सुचारु हुई है। सीए (कंट्रोल्ड एटमॉस्फियर) भंडारण से सीमित मात्रा में माल निकलने के कारण आपूर्ति नियंत्रित रही जिससे कीमतों को स्थिरता मिली और बाजार में संतुलन बना रहा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें