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Jammu News: कश्मीर विलो से बने बल्ले देश ही नहीं विदेशी क्रिकेटरों की भी पसंद

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- अफगानिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश जैसे देशों के क्रिकेटर भी इस बल्ले का करते हैं उपयोग
-सालाना 30 लाख बल्ले बनते हैं, 400 इकाइयां, दो लाख लोगों की रोजी-रोटी भी चल रही
- कश्मीर विलो पेड़ लगाने की संख्या कम, ऐसी स्थिति रही तो पांच साल बाद बैट उद्योग पर आएगा संकट

अरुण कुमार
जम्मू। कश्मीर को सिर्फ पर्यटन, सेब और हस्तशिल्प जैसे उद्योग के लिए ही नहीं बल्कि कश्मीर विलो से बने क्रिकेट बैट के लिए भी जाना जाता है। इससे बना बैट सिर्फ जम्मू-कश्मीर ही नहीं देश के खेल उद्योग में अहम योगदान दे रहा है और इंग्लिश विलो के विकल्प के रूप में इस उद्योग में अपना जगह बना रहा है।
कश्मीर विलो से बने बल्लों का उपयोग सिर्फ देश तक समिति नहीं रहा है। अफगानिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, यूएआई, वेस्टइंडीज और ओमान जैसे देशों के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी इन बल्ले का उपयोग कर रहे हैं। यह कश्मीर विलो की लोकप्रियता और बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। कश्मीर विलो के प्रति बढ़ते इसी भरोसे के चलते कुछ इकाइयों को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) से भी पंजीकरण मिला है। इससे बैट का निर्यात और बढ़ने की संभावनाएं बढ़ी हैं। एक दशक पहले, कश्मीर घाटी में सालाना लगभग तीन लाख बल्ले बनते थे। अब यह संख्या 30 लाख प्रति वर्ष हो गई है। क्रिकेट बैट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन, कश्मीर के प्रवक्ता फैजुल कबीर ने कहा कि कश्मीर विलो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुका है। अंतरराष्ट्रीय स्तर के 47 क्रिकेटरों ने कश्मीर विलो बल्ले का उपयोग किया है। इसकी संख्या लगातार बढ़ रही है। वैश्विक स्तर पर ऐसे देशों में क्रिकेट खेला जा रहा है जहां पहले नहीं खेला जाता था। हमारे पास बड़ा मार्केट है, लेकिन जितनी संख्या में हमें कच्चा माल चाहिए उतनी संख्या में पेड़ बचे नहीं हैं। ऐसी ही स्थिति रही तो पांच साल बाद बैट उद्योग खत्म हो जाएगा।
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400 इकाइयां, दो लाख लोगों की रोजी-रोटी
कश्मीर के उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के पास उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर कश्मीर घाटी में 400 क्रिकेट बल्ले निर्माण इकाइयां हैं। इसमें 220 अनंतनाग जिले में और 180 पुलवामा जिले में हैं। यहीं से देश-विदेश के लिए बल्लों की सप्लाई होती है। इस उद्योग से करीब दो लाख लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं, जो न सिर्फ कश्मीर बल्कि जम्मू में भी रोजगार का बड़ा स्रोत है। देश और विदेश के कश्मीर आने वाले पर्यटक अपनी यात्रा की याद के रूप में कश्मीर विलो से बना बल्ले जरूर खरीदते हैं।
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किफायती और टिकाऊ, खिलाड़ियों की पसंद
कश्मीर विलो की सबसे ताकत इसका किफायती और मजबूत होना है। इंग्लिश विलो के बल्ले की कीमत जहां 1.5 लाख रुपये तक होती है, वहीं कश्मीर विलो का बैट 10 से 20 हजार रुपये में उपलब्ध हो जाता है। यही कारण है कि यह बैट न सिर्फ घरेलू खिलाड़ियों बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लोकप्रिय हो रहा है।
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पेड़ लगाने की रफ्तार कम, ऐसा रहा तो पांच साल में संकट
फैजुल कबीर ने बताया कि बैट उद्योग को बचाने के लिए कश्मीरी विलो पेड़ लगाने की रफ्तार बढ़ाने की जरूरत है। जिस तरह से मांग बढ़ रही है उस हिसाब से कच्चा माल नहीं है। कश्मीर में अभी सालाना एक लाख पेड़ लगाए जा रहे हैं, जिसे 2.50 लाख तक करने की जरूरत है। अगर सरकार का रवैया इसी तरह का रहा तो अगले पांच साल में संकट हो जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारे पास मार्केट बड़ी है, लेकिन संसाधन और कच्चे माल की उपलब्धता न होने से बड़े ऑर्डर नहीं ले पा रहे हैं। सरकार के पास दस हजार हेक्टेयर वेटलैंड हैं जहां सरकार कश्मीर विलो लगा सकती है। इससे न सिर्फ बैट उद्योग बचेगा बल्कि सरकार को भी राजस्व मिलेगा।
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