एसडीपीओ कार्यालय के बाहर विलाप करते परिजन।
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नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की तरफ से तीन मार्च को हिरासत में लिए बीएसएफ के जवान की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। परिजन ने एनसीबी के अधिकारियों पर हत्या का आरोप लगाया है। परिजन ने सरकार और प्रशासन से इंसाफ की गुहार लगाई है। गांव न्यू दीवानगढ़, आरएस पुरा के जसविंदर सिंह बीएसएफ की 42वीं वाहिनी में त्रिपुरा में नियुक्त थे। फरवरी में एक महीने की छुट्टी लेकर घर आए थे। उन्हें पांच मार्च को ड्यूटी पर जाना था। तीन मार्च को वह मां को डॉक्टर के पास दिखाने के लिए जम्मू गए थे। वापस आते वक्त उन्हें मीरां साहिब में बलोल पुल के पास एनसीबी के अधिकारियों ने हिरासत में ले लिया और अपने साथ एनसीबी कार्यालय जम्मू में ले गए।
जसविंदर की मां गुरमीत कौर ने आरोप लगाया कि एनसीबी की टीम में शामिल अधिकारियों ने बेटे की जान ली है उन्हें कड़ी सजा दी जाए। उन्होंने बताया कि अधिकारियों ने कोई वांरट तक नहीं दिखाया और बेटे को अपने साथ ले गए थे।
शुक्रवार शाम परिजन कुछ ग्रामीणों के साथ एसडीपीओ आरएस पुरा के कार्यालय में पहुंचे। बताया कि एनसीबी के अधिकारी जसविंदर को क्यों पकड़कर ले गए इसके बारे में नहीं बताया गया। इस बारे में पुलिस को भी सूचित नहीं किया गया। ऐसा क्या हुआ जिससे बेटे की जान चली गई। जसविंदर का एक दो वर्षीय बेटा भी है। एसडीपीओ आरएस पुरा गुरमीत सिंह ने परिजन को आश्वासन दिया कि उनके साथ अमृतसर में पुलिस भेजी जाएगी और पोस्टमार्टम के बाद शव परिवार को साैंपा जाएगा।
परिजन बोले : फोन कर बताया गया- जसविंदर की हालत ठीक नहीं, अमृतसर अस्पताल में कराया है भर्ती
मां गुरमीत कौर ने आरोप लगाया कि बेटे से मिलने के लिए कई बार एनसीबी कार्यालय गए लेकिन उन्हें मिलने नहीं दिया गया। जसविंदर की पत्नी लवजीत कौर सहित अन्य परिजन ने एसडीपीओ गुरमीत सिंह को बताया कि वीरवार रात उन्हें एनसीबी के एक अधिकारी का फोन आया।
उन्हें बताया गया कि जसविंदर अमृतसर के एक अस्पताल में दाखिल है और उसकी हालत ठीक नहीं है। आप यहां पहुंच जाओ। लवजीत का कहना है कि पति से कुछ दिन पहले आखिरी बार बात हुई थी तो उन्होंने कहा था कि मुझे पीट-पीटकर अधमरा कर दिया है। इसके बाद एनसीबी के अधिकारियों ने पंचायत की पूर्व सरपंच रजनी चौधरी को भी फोन किया। उन्हें बताया गया कि वह परिजन को लेकर अमृतसर पहुंचें।