परगवाल। भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे परगवाल क्षेत्र में चिनाब नदी की बाढ़ से न केवल आम लोग बल्कि सुरक्षा बल भी प्रभावित हुए हैं। मंगलवार की रात भारत-पाक सीमा के अग्रिम नाके पर तैनात बीएसएफ के जवान चिनाब नदी में आई बाढ़ में फंस गए। जवानों को निकालने के लिए सेना को आगे आना पड़ा। चॉपर की मदद से सभी जवानों को सुरक्षित निकाल लिया गया। जबकि एएसआई केसी मधोक बाढ़ के तेज बहाव में बह गए। इस दौरान जवानों ने काफी शोर भी मचाया पर उन्हें निकाला नहीं जा सका। रात भर वह एक पेड़ के सहारे खुद को बचाए रहे। सुबह गांव के युवाओं ने उनकी आवाज सुनी तो जान की परवाह किए बिना ट्यूब का सहारा लेकर बाढ़ के पानी में घुस गए। कड़ी मशक्कत कर जीरो लाइन के निकट पहुंचे और उन्हें बाहर निकाल लाए। युवाओं की बहादुरी की हर ओर प्रशंसा की जा रही है।
ग्रामीणों के अनुसार यह घटना तब हुई जब रात में नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया और बीएसएफ के जवान फंस गए। सूचना के बाद रात में ही सेना ने चॉपर से सभी जवानों को बाहर निकाला लेकिन एएसआई केसी मधोक पानी के तेज बहाव में बह गए। इस दौरान जवानों ने शोर भी मचाया पर उनकी ओर से कोई आवाज नहीं आई। बताया जा रहा है कि बहाव के दौरान मधोक को पेड़ का सहारा मिला तो उन्होंने उस पर चढ़कर जान बचाई। सुबह होने पर अपने साथियों को आवाज दी। इस दौरान उस ओर गए युवाओं ने उनकी आवाज सुनी तो जसपाल सिंह, कुलवीर सिंह, पवन सिंह, रमेश सिंह, सुभाष सिंह और सौदागर सिंह ने असाधारण साहस दिखाया। पानी के तेज बहाव के बावजूद वह ट्यूब की मदद से जीरो लाइन के पास पहुंचे और एएसआई को सुरक्षित निकाल लाए।
स्थानीय लोगों ने युवाओं के जज्बे को सलाम किया। वहीं एएसआई मधोक ने भी सभी का धन्यवाद दिया। परगवाल के लोगों का कहना है कि यह क्षेत्र एक तरफ चिनाब नदी और दूसरी तरफ पाकिस्तान की सीमा से घिरा हुआ है, जिससे वे अन्य कस्बों से कटे हुए हैं।