तिरंगे में लिपटा वीर जवान का पार्थिव शरीर सुबह करीब 10:30 बजे हेलिकॉप्टर से अखनूर के रख मुट्ठी स्थित सैन्य क्षेत्र में पहुंचा। सैन्य अधिकारियों ने बलिदानी को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद पार्थिव शरीर सेना की गाड़ी से पैतृक गांव नई बस्ती नड स्थित आवास लाया गया।
पार्थिव शरीर के गांव पहुंचते ही अंतिम दर्शन के लिए लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा। गांव की गलियां और आसपास का क्षेत्र अजय कुमार भगत अमर रहे और भारत माता की जय के नारों से गूंज उठा। बड़ी संख्या में लोग वीर सपूत को अंतिम विदाई देने के लिए सड़क के दोनों ओर खड़े रहे। युवाओं से लेकर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों तक ने तिरंगे में लिपटे अजय को नम आंखों से सलाम किया। घर में पत्नी मनीषा भगत, मां कांता देवी और चारों बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है। अजय चार बहनों के इकलौते भाई थे।
करीब चार वर्ष पहले उनका विवाह हुआ था। करीब 12 बजे अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हुई। सेना के वरिष्ठ अधिकारियों और कमांडर की मौजूदगी में वीर कमांडो को सैन्य सम्मान के साथ अंतिम सलामी दी गई। सैन्य सम्मान की रस्मों के बीच माहौल गमगीन रहा। अखनूर के विधायक मोहन लाल भगत ने कहा कि अजय कुमार ने देश की रक्षा और सेवा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है।