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लद्दाख के पहले चुनाव के बहिष्कर का एलान, भाजपा-कांग्रेस समेत धार्मिक संगठनों ने पारित किया प्रस्ताव

Wed, 23 Sep 2020 02:39 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, लेह 
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केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद लद्दाख के पहले चुनाव बहिष्कार का एलान हो गया है। लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद लेह के छठे चुनाव के नामांकन दाखिले के पहले दिन मंगलवार को पीपल्स मूवमेंट के बैनर तले चुनाव बहिष्कार की घोषणा की गई। मूवमेंट की शीर्ष समिति में भाजपा, कांग्रेस समेत अन्य सियासी दलों व धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हैं। 

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नई दिल्ली में संसद सत्र के दौरान लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने से इनकार के बाद लद्दाखी प्रतिनिधियों ने मंगलवार को विरोध स्वरूप यह एलान किया। प्रतिनिधियों ने कहा कि लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश तो बनाया गया लेकिन विधानसभा नहीं दी गई। एक वर्ष बीतने के बाद भी स्थानीय परिषदों को सही मायने में स्वायत्त नहीं बनाया गया है।

तीन लाख की आबादी वाले प्रदेश को यदि छठे अनुसूची में शामिल नहीं किया तो यहां की पहचान, संस्कृति, रोजगार, भूमि और जलवायु सब पर बड़ा संकट आ जाएगा। ऐसे हालात में चुनाव का कोई औचित्य नहीं रह जाता। प्रतिनिधियों ने बोडोलैंड हिल काउंसिल की तर्ज पर आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग की।
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आपात बैठक में ये प्रतिनिधि हुए शामिल
पूर्व राज्यसभा सांसद थिकसे खानपो रिंपोछे, पूर्व सांसद थुपसान छेवांग, पूर्व मंत्री छेरिंग दोरजे, आल लद्दाख गोंपा एसोसिएशन अध्यक्ष शतुप चांबा, लद्दाख बुद्धिस्ट एसोसिएशन अध्यक्ष पीजी कुनजंग, अंजुमन इमामिया अध्यक्ष अशरफ अली बारचा, अंजुमन मोइन-उल-इस्लाम अध्यक्ष अब्दुल कयूम, किश्चियन कम्युनिटी अध्यक्ष देछेन चमघा, पूर्व मंत्री व लद्दाख कांग्रेस अध्यक्ष नवांग रिग्जिन जोरा, भाजपा जिला अध्यक्ष लेह नवांग सम्सतान, आम आदमी पार्टी संयोजक टी फुनसोग और एलईएएफ अध्यक्ष जिगमित पलजोर

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