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अस्थियां बहाने के बाद जिंदा लौटा बेटा, पढ़ें खबर

Sun, 02 Nov 2014 10:15 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सांबा
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राजपुरा के सेवानिवृत्त शिक्षक राजकुमार सैनी के घर में छह दिन से मातम का माहौल था। घरवालों ने अपने जिस बेटे दिलबाग को मरा समझ कर उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया था। पिता और बड़ा भाई उसकी अस्थियां गंगा में प्रवाहित करने के लिए हरिद्वार चले गए। उन्हें सोमवार को लौटना है। पर परिवार जिस बेटे की मौत के शोक में डूबा था, वो दिलबाग रविवार को जिंदा घर लौट आया।
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एक बार को तो बेटे को देख सब सन्न रह गए। जिन आंखों से मौत के मातम में आंसू बह रहे थे, उन्हीं आंखों में अब चमक और खुशी के आंसू थे। बेटे की मौत के दुख में कृष्णा देवी ने एक सप्ताह से अन्न का एक दाना नहीं खाया था। रविवार को उनका बेटा घर लौट आने के बाद मां ने बेटे के साथ खुशी खुशी खाना खाया।

फूल प्रवाहित करने हरिद्वार गए पिता और बड़े भाई को भी बेटे के जिंदा होने की जानकारी दे दी गई है। पुलिस के पूछताछ करने पर दिलबाग ने बताया कि वह अपनी डिग्री लेने गया था और वहीं से लौटकर आया है। दिलबाग को देखने उनके घर पर रिश्तेदारों और लोगों का हुजूम लगा हुआ था।
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मां कृष्णा देवी ने बताया कि उनका बेटा दिलबाग सैनी अमरावती में पढ़ता है। वह अपनी डिग्री लेने के लिए पिछले सोमवार को घर से गया था। मंगलवार तक उसका कोई फोन नहीं आया। अनहोनी की आशंका पर उन्होंने अपने एक रिश्तेदार को फोन किया जो रेलवे में कार्यरत हैं। उन्होंने कठुआ, पठानकोट व जालंधर रेलवे स्टेशनों पर फोन कर पूछताछ की।

जालंधर से उन्हें पता चला की फगवाड़ा के पास चहेडु में ट्रेन के नीचे आने से दो लोगों की मौत हो गई है। उनके शव फगवाड़ा अस्पताल में हैं। परिवार के लोग वीरवार को फगवाड़ा पहुंचे। शव बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने के कारण स्पष्ट रूप से पहचान नहीं हो पाई। सिर्फ शव के फोटो से लगा कि यह उनका ही बेटा था। इसके बाद वह शव अपने घर ले आए। शुक्रवार को शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। घटना के बाद पूरे कसबे में मातम का माहौल था।

युवा बेटे की मौत से परिवार बुरी तरह टूट चुका था। रविवार दोपहर साढ़े तीन बजे उनके घर पर कुछ लोग आए। उन्होंने कृष्णा देवी को बताया कि उनका बेटा तो बाजार में है और वह घर आ रहा है। इस पर उन्हें लगा कि उनसे झूठ बोला जा रहा है। कुछ समय बाद जब बेटा घर पहुंचा तो कृष्णा देवी को अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हुआ।
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