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Jammu News: चिनाब में नाव बनी जीवनरेखा, निशुल्क सेवा का लाभ उठा रहे ग्रामीण

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- सड़क से ज्याैड़ियां-खौड़ पंहुचने के लिए तय करना पड़ता है 50 किमी का सफर
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- नाव से मात्र 10 किमी रह जाती है दूरी, परगवाल से रोज सैकड़ों लोग कर रहे सफर
जितेंद्र सिंह
परगवाल। सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों के लिए चिनाब नदी में (इंद्री पत्तन) चलने वाली नाव आवागमन का एक अहम साधन बनी हुई है। इसके जरिये रोज सैकड़ों लोग नदी आर-पार कर अपने काम पर पहुंच रहे हैं। यह सुविधा निशुल्क दी जा रही है।
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काम के सिलसिले में खौड़ या ज्याैड़ियां जाने वाले परगवाल के ग्रामीण अब सड़क मार्ग के बजाय नाव में सफर को प्राथमिकता दे रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है की सड़क मार्ग से उन्हें ज्याैड़ियां या खौड़ पंहुचने के लिए लगभग 50 किलोमीटर का लंबा सफर तय कर अखनूर से होकर जाना पड़ता है। नाव से यही दूरी मात्र 10 किलोमीटर रह जाती है। इससे न केवल समय की बचत हो रही है, बल्कि जेब खर्च भी बचता है। नाविक जगदीश सिंह, सुरेंद्र पाल कहना है की हर सुबह नाै बजे से शाम पांच बजे तक सैकड़ों लोग चिनाब को नाव से आर-पार कर अपनी मंजिल तक पहुंच रहे हैं। बाढ़ नियंत्रण विभाग के सहयोग से संचालित इस नाव सेवा की खास बात यह है की इसमें लोगों से किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता। निशुल्क और सुगम सुविधा होने से यह नाव आम लोगों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो रही है। हालांकि कुछ परेशानियां भी हैं जैसे नाव पर पहुंचने के लिए लंबा सफर पत्थरों के बीच पैदल ही तय करना पड़ता है। फिर भी लोग ज्यौड़ियां, खौड़, पलांवाला जाने के लिए नाव का ही सहारा ले रहे हैं। यह नाव ग्रामीणों की जीवन रेखा बनी हुई है। लहरों पर चलती यह नाव न सिर्फ सफर को आसान बना रही है बल्कि लोगों को प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेने का भी मौका देती है। नदी में पानी कम होने पर नाव साल भर में तीन से चार महीने ही चलती है। लोग इसके चलने का बेसब्री से इंतजार करते हैं। (संवाद)
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