कश्मीर हिंसा में सुरक्षा बलों की कार्रवाई में मारे गए पत्थरबाजों के परिवारों को मुआवजे के फैसले को भाजपा लागू नहीं होने देगी। भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी ने विरोध प्रस्ताव पारित कर सरकार के फैसले पर कड़ा एतराज जताया है। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने विधानसभा में मुआवजे का एलान किया था।
इसके तहत सुरक्षा बलों की कार्रवाई में मारे गए लोगों के परिवारों को 5 लाख रुपये और परिवार के एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी देने का निर्णय शामिल है। इसके साथ ही पेलेट गन से अंधे हुए बच्चों को दून इंटरनेशनल स्कूल में शिक्षा और घायलों को एक लाख रुपये की मदद की व्यवस्था है।
महबूबा की एकतरफा घोषणा के बाद सत्ताधारी गठबंधन के दोनों दलों भाजपा और पीडीपी में तकरार बढ़ गई है। कार्यकारिणी को संबोधित करने के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने अमर उजाला से कहा कि कार्यकारिणी ने प्रस्ताव पास किया है कि कश्मीर में देशद्रोह के आरोपियों को मुआवजे का विरोध किया जाएगा।
'देशद्रोह के आरोपियों को मुआवजे का निर्णय उचित नहीं'
भाजपा सांसद का बयान
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पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और सांसद जुगल किशोर शर्मा ने कहा कि कश्मीर हिंसा में सुरक्षा बलों पर हमले किए गए। सैन्य शिविरों और कैंपों पर हमलों के क्रम में मौतें हुईं। पाकिस्तान जिंदाबाद और आजादी के नारे लगाने वाली हिंसक भीड़ और उपद्रवियों पर सुरक्षा बलों ने कार्रवाई की।
अब देशद्रोह के आरोपियों को मुआवजे का निर्णय उचित नहीं है। अमरनाथ आंदोलन में तिरंगा झंडा लेकर लोगों ने हक मांगा था। अमरनाथ आंदोलनकारियों पर चल रहे मुकदमे पहले वापस लिए जाने चाहिए और उस आंदोलन के पीड़ितों को मुआवजे का तुंरत एलान होना चाहिए।
'कश्मीर हिंसा सुनियोजित तरीके से फैलाई गई'
घाटी में 4 महीनें तक रहा था हिंसा का माहौल
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कार्यकारिणी के प्रस्ताव में कहा गया कि कश्मीर हिंसा सुनियोजित तरीके से फैलाई गई। तथाकथित जेहादियों, कट्टरवादियों और अलगाववादियों ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की मदद से हिंसा के लिए माहौल बनाकर घटनाओं को अंजाम दिया। पाकिस्तान पोषित आतंकी संगठनों और पाकिस्तान ने हिंसा की आग को हवा दी।
प्रस्ताव में केंद्र सरकार की नीतियों का समर्थन करते हुए कहा गया कि पाकिस्तान को पूरी दुनिया में अलग-थलग करने की कोशिश सफल हुई है। अलगाववादियों का चेहरा बेनकाब हुआ है। आतंकवाद के खिलाफ माहौल बनाने में भी सफलता मिली है। नोटबंदी के फैसले को उचित ठहराते हुए कहा गया है कि इससे हवाला कारोबार थमा और आतंकवाद की कमर टूट गई।