भाजपा के प्रदेश सचिव अनिल परिहार व उनके भाई की हत्या के मामले में प्राथमिक जांच में सामने आ रहा है कि गोली मारने वाले दो आतंकवादी थे, जो अंधेरे का लाभ लेते हुए हत्या करने के बाद मोटरसाइकिल से फरार हो गए। बताया जाता है कि किश्तवाड़ में पिछले कई सालों से दो आतंकी जहांगीर सरूरी और रियाज सक्रिय हैं और इसको लेकर पांच अक्तूबर को डीजीपी दिलबाग सिंह ने उधमपुर में आयोजित पुलिस दरबार में अफसोस भी जताया था कि उन्हें अभी तक नहीं पकड़ा जा सका है। आशंका है हत्या करने वाले यही दोनों आतंकी हो सकते हैं।
क्या कहा था डीजीपी ने
डीजीपी ने उधमपुर में कहा था कि कुछ वर्ष पहले जब पुलिस ने जम्मू संभाग में आतंकवाद को खत्म किया था तो उस समय किश्तवाड़ में दो व रामबन में दो आतंकवादी बच गए थे। अफसोस की बात है कि आज भी यह आतंकवादी रामबन और किश्तवाड़ में मौजूद हैं।
वीरवार रात को किश्तवाड़ में जब आतंकियों के अनिल परिहार व अजीत परिहार की हत्या का मामला सामने आया और हत्या करने वाले दो आतंकियों के होने की सूचना मिली, तो सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान सबसे पहले सक्रिय आतंकी जहांगीर सरूरी और रियाज की तरफ ही गया। सुरक्षा एजेंसियों को भी लग रहा है कि यह दोनों ही हत्या करने वाले आतंकी हो सकते हैं। अगर यही दोनों सक्रिय आतंकी हैं, तो इसे पुलिस व सुरक्षा एजेंसियों की नाकामी माना जा सकता है। दोनों आतंकी 90 के दशक से सक्रिय हैं और पुलिस इनको पकड़ नहीं सकी है। सुत्रों के अनुसार, जहांगीर सरूरी की उम्र तो लगबग 50 वर्ष है।