पीडीपी और भाजपा के बीच गठबंधन क्षेत्रीय संतुलन के आधार पर हो सकता है। पीडीपी को कश्मीर में और भाजपा को जम्मू संभाग में स्पष्ट जनादेश मिला है।
कांग्रेस और नेकां की अधिकांश सीटें कश्मीर से हैं। इस तरह भाजपा को साथ लिए बगैर नई सरकार में जम्मू का सही प्रतिनिधित्व संभव नहीं है।
यही कारण है कि पीडीपी और भाजपा करीब आने को मजबूर दिखते हैं। हालांकि, कांग्रेस किसी भी कीमत पर सरकार में शामिल होने के लिए जी-तोड़ कोशिश कर रही है लेकिन पीडीपी ने अब तक कांग्रेस के प्रस्ताव का उत्तर नहीं दिया है।
राज्यपाल से मिलने के बाद पीडीपी अध्यक्ष ने भी कहा कि चुनौतीपूर्ण जनादेश का सम्मान होना चाहिए। केंद्र सरकार को बड़ी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
'बहुमत नहीं, गठबंधन मजबूरी'
महबूबा ने कहा, जम्मू में भाजपा को ज्यादा सीटें मिली हैं और कश्मीर में जनादेश बिखरा है और पीडीपी को सबसे ज्यादा सीटें हासिल हुई हैं।
महबूबा ने कहा कि निर्णायक और बिखरे हुए जनादेश को देखते हुए एनडीए हो या कांग्रेस व पूरे देश के पास मौका है कि वह जम्मू कश्मीर में विकास और शांति की दिशा में कदम उठाए।
सरकार गठन के लिए चल रही शह और मात की सियासत के तहत पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने नेकां और कांग्रेस के विधायकों को अपने साथ जोड़कर महा गठबंधन के विकल्प को भी खुला रखा है।
पीडीपी को 28, भाजपा को 25, कांग्रेस को 12 और नेकां को 15 सीटें मिली हैं। अन्य के खाते में 7 सीटें हैं। बहुमत के लिए जरूरी 44 का आंकड़ा किसी एक दल के पास नहीं है, इसलिए गठबंधन मजबूरी बन गई है।
कांग्रेस के साथ नहीं जाने के संकेत दिए
पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा कि वाजपेयी ने जम्मू कश्मीर को उधार आर्थिक पैकेज दिया था। यूपीए सरकार ने कुछ दिन तक उसे जारी रखने के बाद बंद कर दिया। यूपीए की आलोचना कर महबूबा ने कांग्रेस के साथ नहीं जाने के संकेत दिए।
पीडीपी-भाजपा गठबंधन का संभावित फार्मूला
•पीडीपी के मुफ्ती सीएम, भाजपा का डिप्टी सीएम
•अनुच्छेद 370 पर यथास्थिति
•आतंकवाद से अप्रभावित इलाकों से अफस्पा की वापसी पर विचार
(सेना, सुरक्षा बलों से विचार-विमर्श का बिंदु जोड़ा जा सकता है।)
राज्यपाल से मिले सोज, भाजपा ने नहीं छोड़ा दावा
कांग्रेस अध्यक्ष सैफुद्दीन सोज से बुधवार को मुलाकात की। उन्होंने कहा कि राज्यपाल से मुलाकात में जम्मू कश्मीर रियासत के आर्थिक सामाजिक और आर्थिक विकास से संबंधित मामलों पर चर्चा हुई।
सोज का कहना है कि मौजूदा समय कठिन है और सतर्क रहने की जरूरत है। खासतौर से सरकार गठन के मामले पर उनका विचार है कि पीडीपी को विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें हासिल हुई हैं।
सरकार गठन की दिशा में पीडीपी को पहला कदम उठाना है। इसके बाद कांग्रेस जम्मू कश्मीर के लोगों को अपनी की स्थिति बारे जानकारी देगी।
भाजपा ने अभी मुख्यमंत्री पद पर दावा नहीं छोड़ा है। वार्ता की मेज पर पीडीपी को मौका दिया जा सकता है। तब भाजपा तीन-तीन साल के सीएम पर गठबंधन की कोशिश कर सकती है।