कठुआ के रसाना कांड को लेकर देशभर में मचे बवाल के बीच एक बार फिर से रियासत की सियासत का पारा गर्म हो गया है। भारी दबाव के चलते भाजपा के दो मंत्रियों से इस्तीफा ले लिया गया है। शुक्रवार को उद्योग मंत्री चंद्र प्रकाश गंगा तथा वन मंत्री चौधरी लाल सिंह ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष को इस्तीफा सौंप दिया।
प्रदेश अध्यक्ष सत शर्मा ने इस्तीफा सौंपे जाने की पुष्टि करते हुए बताया कि दोनों ने नैतिकता के आधार पर सौंपा है न कि पार्टी ने इस्तीफा मांगा है। शनिवार को राष्ट्रीय महासचिव राम माधव की मौजूदगी में होने वाली विधायक दल की बैठक में इस्तीफा स्वीकार करने पर फैसला लिया जाएगा।
सूत्रों का कहना है कि इस्तीफे के पीछे गठबंधन सहयोगी पीडीपी तथा पीएमओ का दबाव मुख्य वजह है। बताया जा रहा है कि पीडीपी प्रमुख तथा मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती पर अपनी ही पार्टी के मंत्रियों तथा विधायकों का भारी दबाव था। इनका कहना था कि भाजपा के इन मंत्रियों की वजह से पार्टी की छवि धूमिल हो रही है।
इसका भारी खामियाजा उठाना पड़ सकता है। बताया जा रहा है पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की ओर से भी दोनों मंत्रियों को बर्खास्त करने में देरी पर सवाल उठाए गए थे।
देश में चौतरफा विरोध के चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी अपना स्टैंड क्लीयर करना पड़ा।
इससे भी सूबे की भाजपा को संकेत मिल गए थे कि इस मसले पर पीएम कितने गंभीर हैं। राज्य में तेजी से बदल रहे राजनीतिक हालात के बीच ही मंत्री को हटाने के लिए पीडीपी ने दबाव बढ़ाया और शुक्रवार की शाम दोनों मंत्रियों का इस्तीफा ले लिया गया।
बताते हैं कि पिछले दिनों रियासत के दौरे पर आए राम माधव ने भी रसाना मामले को लेकर इन दोनों मंत्रियों के रैली में शामिल होने पर फटकार लगाई थी। साथ ही संभलकर बयानबाजी करने की हिदायत दी थी।
बता दें कि दोनों मंत्रियों ने कठुआ कांड में आरोपियों की बचाने के लिए 1 मार्च को निकाली गई रैली में हिस्सा लिया था। जिसके बाद से ही वो विवादों के घेरे में थे। नेशनल कांफ्रेंस की नेता उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट कर सीएम महबूबा से उनपर कार्रवाई करने की मांग कर रहे थे। वहीं सूत्रों के मुताबिक सीएम महबूबा मुफ्ती की नाराजगी के बाद बीजेपी ने अपने दो मंत्रियों से इस्तीफा मांगा है।