पहलगाम में सब सामान्य है, लोग आ रहे हैं, जा रहे हैं, ठहर रहे हैं। हां, यहां आने पर याद आ जाती है 22 अप्रैल की तारीख। ये कहना है लखनऊ से 24 लोगों को ग्रुप में आए चंद्र प्रकाश सिंह का। गुरुवार को चंद्र अपने साथियों मयंक, पवन, वशशाल, दीपक, सोमी, शिवांशी और अन्य के साथ जम्मू से होकर पहलगाम पहुंच गए। शुक्रवार को पहले शिव मंदिर में दर्शन किया, उसके बाद निकल पड़े आगे।
लखनऊ के मूल निवासी चंद्रप्रकाश ने अमर उजाला से फोन पर बातचीत में अपने यात्रा से जुड़े अब तक के अनुभव साझा किए। कहते हैं कि पहलगाम के दोषियों को सजा तो भोले देंगे। हम तो उनसे यही मांगने आए हैं। शनिवार को भोर में हम दर्शन करने निकलेंगे।
यहां आने के फैसले के सवाल पर कहते हैं कि डरना किस बात का है। डरना तो दहशतगर्दों को चाहिए। मयंक और पवन कहते हैं कि हम लोग लगातार 12 साल से आ रहे हैं। हर साल बायसरन जरूर जाते थे, इस बार वहां जाना मना है। उसे न देख पाने का मलाल जरूर रहेगा।
हर कदम पर सुरक्षा और सुविधासोमी और शिवांशी कहती हैं कि जिस होटल में हम रुके हैं, उसके ठीक सामने बंकर बना है। इसी तरह हर कदम पर यहां सुरक्षाकर्मी चौकस हैं। सुना है कि काफी सुविधाएं बढ़ाई गई हैं, हम लोग इंतजार कर रहे हैं, कि कल यात्रा के दौरान उसे देखें।
खूब हो रहा मोलभाव
चंद्र प्रकाश बताते हैं कि इन दिनों होटल वालों से खूब बार्गनिंग चल रही है। हर बार वे मनमाना किराया वसूल लेते थे, इस बार वे ग्राहक से जबरदस्ती नहीं कर पा रहे हैं। हम लोगों को भी 3500 वाले कमरे 2000-2000 हजार में मिल गए हैं।