न्यायालय ने कहा कि जरूरी सुविधाओं के लिए संघर्ष उन्हें भिखारी बना देता है। यह सरकार की नाकामी है कि गरीब को यह सब उपलब्ध नहीं करा पाते। इसलिए वह भीख मांगने पर मजबूर होता है। जीने के लिए इस तरह का संघर्ष अपराध तो नहीं हो सकता। गरीब आर्थिक रूप से पिछड़े हैं।
जम्मू कश्मीर प्रिवेंशन आफ बेगरी एक्ट 1960 और इसके 1964 के तहत नियम पूरी तरह से अकारण, गलत और मनमाने हैं। यह संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) और डी के तहत आजादी पर हमला है।
यह कानून दोनों के बीच असमानता भी पैदा करता है। इस तरह का प्रतिबंध समाज हित में नहीं हैं। इस एक्ट को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। जजों की खंडपीठ ने कहा कि भीख मांगना अपराध नहीं हो सकता। इसलिए इसे लेकर राज्य के कानून और इसके नियमों को निरस्त किया जाता है। मौजूदा एक्ट के तहत भीख मांगने को अपराध बताया गया था जिसके लिए सजा का प्रावधान भी था।
-जम्मू शहर में पांच हजार भिखारी
बता दें कि जम्मू कश्मीर में भीख मांगने वालों की संख्या काफी हो चुकी है। कई बार बड़े स्तर पर भी इसे लेकर मामला उठा है। जम्मू शहर में ही पांच हजार के करीब भीख मांगने वाले हैं।