लोकसभा चुनाव से ठीक पहले पहाड़ियों को एसटी का दर्जा देकर भाजपा ने बड़ा दांव चला है। इसके जरिये जम्मू-कश्मीर की एक और लोकसभा सीट झटकने पर नजर है। अब तक भाजपा के पास दो सीटें हैं जबकि नेशनल कांफ्रेंस के पास तीन। कश्मीर की तीन सीटों पर क्षेत्रीय दलों का ही पिछले कुछ चुनाव से कब्जा होता आया है। इस आरक्षण से लोकसभा चुनाव में उथल-पुथल की संभावना जताई जा रही है। इससे क्षेत्रीय दलों नेकां व पीडीपी, अन्य कश्मीर आधारित पार्टियों के साथ ही कांग्रेस के लिए भी परेशानी खड़ी हो सकती है।
पहाड़ियों का एलओसी से सटे चार जिलों राजोरी, पुंछ, बारामुला व कुपवाड़ा में प्रभाव है। इन चार जिलों में पहाड़ियों के प्रभाव वाले विधानसभा की 12 सीटें हैं। वर्तमान परिसीमन में दक्षिण कश्मीर की अनंतनाग सीट का नाम बदलकर राजोरी-अनंतनाग कर दिया गया है। इसमें कश्मीर से 11 और जम्मू संभाग की सात सीटें हैं।
राजोरी-पुंछ जिले की पांच व अनंतनाग की कोकरनाग सीटों पर पहाड़ियों का वर्चस्व है। अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित विधानसभा की नौ सीटों में राजोरी, बुद्धल व थन्नामंडी (सभी राजोरी), सूरनकोट व मेंढर (सभी पुंछ), कोकरनाग (अनंतनाग) शामिल हैं। लगभग नौ लाख मतदाता हैं। भाजपा से जुड़े रणनीतिकारों का मानना है कि इन सात सीटों के जरिये कश्मीर आधारित पार्टियों के लिए राजोरी-अनंतनाग सीट जीतने की राह में मुश्किलें खड़ी की जा सकती हैं।
इंडिया गठबंधन में अब तक सीटों का बंटवारा न होने की वजह से यह माना जा रहा है कि इसमें शामिल सभी दल अलग-अलग चुनाव लड़ सकते हैं। साथ ही अनंतनाग सीट पर कश्मीर केंद्रित दलों के बीच मतों के विभाजन से जीत की राह आसान बन सकती है। भाजपा अध्यक्ष रवींद्र रैना का कहना है कि एलओसी से लगे चार जिलों की 12 सीटों पर पहाड़ियों का वर्चस्व है। लोकसभा चुनाव में राजोरी-अनंतनाग सीट पर पार्टी बेहतर प्रदर्शन करेगी। उम्मीद है कि आरक्षण से पहाड़ी समुदाय भाजपा का साथ देगा।
अनंतनाग-राजोरी सीट में यह विधान सभा सीटें
शोपियां जिले की जैनापोरा, कुलगाम जिले की डीएच पोरा, कुलगाम व देवसर, अनंतनाग जिले की डोरू, कोकरनाग, अनंतनाग पश्चिम, अनंतनाग, श्रीगुफवाड़ा-बिजबिहाड़ा, शांगस-अनंतनाग पूर्व व पहलगाम, राजोरी जिले की नौशेरा, राजोरी, बुद्धल व थन्नामंडी और पुंछ जिले की सूरनकोट, पुंछ-हवेली व मेंढर शामिल है।