परीक्षाओं के खत्म होने के साथ ही बाहरी राज्यों के प्रोफेशनल और अन्य कालेजों की संभाग में भरमार लगना शुरू हो जाएगी। टीवी चैनल और समाचार पत्रिकाओं के माध्यम से स्थानीय युवाओं को अपने कालेजों में दाखिला लेने के लिए कई योजनाओं और सुविधाओं के साथ आकर्षित करने का प्रयास किया जाएगा।
इसके साथ ही संभाग के विभिन्न इलाकों में जाकर अपने कालेज से संबंधित प्रेस कांफ्रेंस या अन्य एड के जरिये लोगों को जानकारी देने में जुटेंगे। अभिभावक अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा और डिग्री दिलवाने के लिए दूसरे राज्यों के अच्छे कालेजों में दाखिला दिलवाना पसंद करते हैं।
समाचार पत्रिकाओं और न्यूज चैनलों में दिए जाने वाले विज्ञापन पर भरोसा करने से पहले अभिभावकों को चाहिए कि वे दाखिला दिलवाने से पहले पूरी और सही जानकारी संस्थान की लें। कई बार ऐसे मामले सामने आते हैं कि जिस कालेज से इंजीनियरिंग या अन्य डिग्री हासिल की गई है, वह प्रमाणित ही नहीं था, जिससे विद्यार्थियों के भविष्य के साथ जीवन भर की पूंजी भी बर्बाद हो जाती है।
जम्मू यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट वेलफेयर के डीन प्रो. पंकज कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि परीक्षाओं के समाप्त होने के बाद से ही कालेजों और अन्य शिक्षण संस्थान से संबंधित विज्ञापन और दाखिले में मिलने वाली विभिन्न स्कीमों की भरमार लग जाती है। उन्होंने कहा कि अभिभावकों को चाहिए कि वे अपने बच्चों को सही कालेज या शिक्षण संस्थान में दाखिला दिलवाने से पहले कालेज की पूरी पड़ताल कर लें।
यूजीसी (यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन) और आरटीआई (राइट टू इन्फार्मेशन) की साइट पर राज्यों के प्रमाणित कालेजों के बारे में पूरा विवरण होता है, जिसकी मदद से अभिभावक अपने बच्चों को अच्छे कालेज में दाखिला दिलवा सकते हैं।