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जम्मू-कश्मीरः अब ज्यादा महक और दोगुनी पैदावार वाली बासमती उगाएंगे किसान

Thu, 20 Feb 2020 04:07 PM IST
प्रशांत कुमार सतीश वालिया, जम्मू
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बासमती चावल - फोटो : अमर उजाला
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ज्यादा खुशबू, जायके में बेहतर और दोगुना से भी ज्यादा पैदावार देने वाली बासमती 138 की नई किस्म से किसानों को खरीफ सीजन में बड़ा मुनाफा होगा। शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी जम्मू (स्कास्ट-जे) बासमती 138 का अंतिम ट्रायल जून में पूरा करने जा रही है।

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यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी की ओर से तैयार बासमती की नई किस्म पर 2014 से ट्रायल चल रहा है। स्थानीय स्तर पर तैयार इस किस्म को 2017 से यूनिवर्सिटी के फार्मों में उगाया जा रहा है। पड़ोसी राज्यों के कृषि विश्वविद्यालय भी अपने फार्मों में इसे उगा रहे हैं। अगले साल जून से जम्मू-कश्मीर समेत पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में इसका बीज किसानाें को मिलने लगेगा। वर्तमान में बासमती 370 का बीज दिया जाता है। इसी की जगह नई किस्म का बीज बांटा जाएगा।

पहले बीजी जा रही बासमती 370 की प्रति हेक्टेयर पैदावार 22 से 25 क्विंटल होती थी। नए बीज की पैदावार 50 से 55 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होगी। इससे 2002 तक किसानों की आय को दोगुना करने में मदद मिलेगी। स्कास्ट-जे के अनुसार बासमती के नए बीज को तैयार करने का मकसद किसानों की आय बढ़ाना है।

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बासमती 370 को इसीलिए सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है

बासमती 138 का स्वाद 370 से बेहतर बताया गया है। पकने के बाद चावल महक भी ज्यादा देता है। लोग सुगंधित चावल खाना पसंद करते हैं। बासमती 370 को इसीलिए सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। अब ज्यादा महकदार और स्वादिष्ट बासमती 138 इसका विकल्प बनेगा।

फसल तैयार होने में लगेंगे 120 दिन
बासमती 138 की बिजाई के बाद फसल तैयार होने में 120 दिन लगेंगे। बासमती 370 को पकने में 160 से 170 दिन लग जाते थे। फसल चक्र की अवधि छोटी होने से किसानों के समय की बचत होगी।


बासमती 138 के बीज का इस बार अंतिम ट्रायल होगा। अब तक लगभग सभी कसौटियों पर यह किस्म खरी उतरी है। बासमती 370 से इसका स्वाद बेहतर है। ज्यादा महकदार किस्म की खेतों में बिजाई 2021 से करने की तैयारी है।
- डॉ. जेपी शर्मा, निदेशक अनुसंधान, स्कास्ट-जे 
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