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बेटियों के लिए मिसाल है घाटी की पहली फुटबॉल कोच नादिया के 'मैरीकॉम' बनने की कहानी

Wed, 24 May 2017 05:54 PM IST
श्रेयांश त्रिपाठी,अमर उजाला/जम्मू
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nadiya - फोटो : Amar Ujala
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तनाव से जूझ रही कश्मीर घाटी में बंधे दायरे से निकल पहली महिला फुटबाल कोच का खिताब पाने वाली नादिया निगहत अब ‘मैरीकॉम’ बनने की राह पर है। वह ऐसी पहली फुटबाल कोच हैं, जो बाक्सिंग खिलाड़ी के रूप में रिंग में उतर रही हैं।
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श्रीनगर में जिला लेवल पर हुई चैंपियनशिप में गोल्ड हासिल करने के बाद अब वह नेशनल बाक्सिंग एकेडमी जा पहुंची हैं, जहां उनकी ट्रेनिंग शुरू हो गई है। नादिया जमकर पसीना बहा रही हैं।नादिया आल इंडिया फुटबाल फेडरेशन (एआईएफएफ) से डी लाइसेंस हासिल कोच हैं।

श्रीनगर में लड़कियों को फुटबाल के मैदान तक पहुंचाने में उनका बड़ा योगदान है। इसके चलते घाटी की लड़कियों के लिए नादिया रोल माडल हैं। नादिया ने बाक्सर केतौर पर रिंग में उतरने के लिए नेशनल बाक्सिंग एकेडमी का ट्रायल दिया था, जिसमें उन्हें चुन लिया गया। 
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रोज करती हैं कड़ी मेहनत

बाक्सिंग खिलाड़ी के रूप में रिंग में उतर रहीं नादिया - फोटो : डेमो पिक
बकौल नादिया अब सुबह साढ़े पांच बजे से रिंग में पहुंचकर प्रैक्टिस करके वह दो घंटे बाद हास्टल पहुंचती हैं। शाम को फिर पांच बजे से साढ़े सात बजे तक ट्रेनिंग का वक्त होता हे।नादिया साल भर यहां खुद को इतना मजबूत बना लेना चाहती हैं, जिससे उनके आगे रिंग में कम-से-कम कोई न ठहर सके। अपने पाजिटिव एटीट्यूड के लिए वह अपने परिवार के साथ ही अपने श्रीनगर के बाक्सर कोच फारुख का शुक्रिया अदा करना भी नहीं भूलतीं।

देश के कई हिस्सों में पिछले दिनों कश्मीरी होने की वजह से लोगों की हिंसा का शिकार होने की घटना सामने आई है। लेकिन नादिया को कश्मीरी होने की वजह से ज्यादा प्यार और ध्यान मिल रहा है। नादिया के बकौल कोच जगदीश सिंह और एकेडमी डायरेक्टर सतीश दोनों उसका बेहद ख्याल रख रहे हैं।

पैसे के बदले पत्थर बरसाने वालों बरसीं नादिया पैसे लेकर पत्थर बरसाने वालाें के सख्त खिलाफ हैँ। उनकी मानें तो पत्थरबाज ठीक नहीं कर रहे। हर चीज को समय चाहिए होता है। संघर्ष की जरूरत होती है। खास तौर पर विद्यार्थियों को पैसे लेकर पत्थर फेंकने की बात से उनमें गुस्सा दिखा। उन्होंने साफ कहा कि सब्र सबसे बड़ी दवा है।
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