रविवार की छुट्टी का दिन हो या फिर व्यस्त जीवन से बमुश्किल निकले फुर्सत के लमहे। उन पर पेड़ों से बतियाने की धुन सवार रहती है। पर्यावरण प्रेम के ये अनोखे विद्यार्थी जहां भी जाते हैं, आकर्षण का केंद्र बन जाते हैं। आधुनिक जीवन का हिस्सा बने पेड़-पौधे, फल, फूल और पत्तियों के संसार की उत्पत्ति से लेकर समूची वंशबेल से वह हर आम और खास को रू-ब-रू करवाते हैं।
19 दिसंबर 2010 को ट्री टाक यानी वृक्ष चर्चा अभियान को शुरू करने वाले ओपी शर्मा (विद्यार्थी) आज अपनी अनोखी मुहिम से न सिर्फ अलग पहचान स्थापित कर चुके हैं, बल्कि हजारों युवाओं और समाज के हर वर्ग से लोगाें के मानस पर पर्यावरण प्रेम के बीज अंकुरित कर चुके हैं। व
र्तमान में इकोलॉजी, इनवायरनमेंट एंड रिमोट सेंसिंग के डायरेक्टर पद पर कार्यरत ओपी शर्मा शिक्षा संस्थानों से लेकर सार्वजनिक स्थलों पर ट्री-टॉक आयोजित करते हैं। ट्री टॉक के लिए चुने गए स्थान पर जो भी छोटे बड़े पेड़ मौजूद हों ओपी विद्यार्थी अपनी विशेष शैली और असीम ज्ञान से न सिर्फ कौतूहल जगाते हैं, बल्कि बेहद सरल शब्दों में पेड़ों के इतिहास, मानव जीवन के लिए महत्व और पर्यावरण में उनके योगदान पर विस्तृत ब्योरा देते हैं।
ओपी शर्मा बताते हैं संयुक्त राष्ट्र द्वारा 2011 से 2020 तक के दशक को विश्व जैव विविधता दशक घोषित किया गया। उन्होंने पर्यावरण 19 दिसंबर 2010 को जम्मू यूनिवर्सिटी के बॉटनी विभाग में पहली ट्री टाक आयोजित की। 72 लोगों ने लगातार चार घंटे की विचारोत्तेजक चर्चा में हिस्सा लिया। इसके बाद जम्मू कश्मीर सहित हैदराबाद, मैसूर, दिल्ली, देहरादून और पंजाब तक ट्री टाक अभियान को विस्तार मिला।
अभियान के अब तक 424 संस्करण आयोजित हो चुके हैं। दिलचस्प तथ्य साझा करते हुए ओपी शर्मा कहते हैं हर पेड़ के साथ विरासती और ऐतिहासिक महत्व जुड़ा होता है। जिया पोता घाट की मिसाल देकर वह बताते हैं जिया पोता असल में एक पेड़ का नाम है, जिसके नाम से घाट को जाना जाता है।
ओपी शर्मा के अनुसार रासायनिक खाद के बढ़ते प्रयोग से कई पेड़ पौधे लुप्त होने लगे हैं। ऐसे में इन पौधों को बचाने के लिए जंगल में मौजूद इनकी वंशबेल से जीन ट्रांसफर करने की जरूरत होगी। समूची जैव विविधता का अस्तित्व पेड़ पौधों के वजूद पर निर्भर करता है, जिसके बारे में सभी को पता होना चाहिए।