श्रीनगर। नवंबर 2023 को मैं कैसे भूल सकती हूं। वाटर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में मैं बच्चों को ट्रेनिंग दी रही थी कि अचानक एक न्यूज पोर्टल के जरिए पता चला कि एसीबी ने मेरे खिलाफ मुकदमा दर्ज कर किया है। ऐसा लगा कि मेरे सारे सपनेे खत्म हो गए, मेरा वजूद मिट गया। उस समय तो मुझे एसीबी का पूरा नाम भी नहीं पता था। कश्मीर में जिस वाटर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स को मैंने अपने खून से सींचा था उसी से मुझे अलग कर दिया गया लेकिन कहते हैं ना कि सूरज की तरह चमकने के लिए सूरज की माफिक जलना भी पड़ता है और पतझड़ के बाद ही नए और खूबसूरत पत्ते आते हैं। ठीक ऐसा ही हुआ। माननीय जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने मुझे बेदाग बरी किया है। यह मेरी नहीं बल्कि कायकिंग और कैनोइंग स्पोर्ट्स से जुड़ी जम्मू-कश्मीर और देश की लाखोंं लड़कियों की जीत है। उनके सपनों के साकार होेने की जीत है।
यह कहना भारत की एकमात्र महिला जिन्हें 2024 पैरिस ओलंपिक्स में ‘कायकिंग और कैनोइंग. के लिए जज के रूप में चुना गया था बिलकिस मीर का है। 2023 में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) द्वारा उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को जम्मू और कश्मीर हाईकोर्ट द्वारा रद्द किए जाने के बाद वह ‘अमर उजाला’ से मुखातिब थीं। बेदाग साबित होने के बाद बेहद ही भावुक बिलकिस मीर ने अतीत के पन्नों को पलटते हुए बताया कि 1998 में उन्होंने महज आठ वर्ष की उम्र में ‘कायकिंग और कैनोइंग’ की प्रैक्टिस शुरू की थी। उस समय श्रीनगर शहर में स्थित डाउन टाउन खानियर स्थित घर से प्रैक्टिस के लिए जाते समय लोग मुझे और मेरे माता-पिता को क्या कुछ कहते थे इसका अंदाजा लगाना नामुमकिन है।
तमाम बंदिशों के बीच मेरी आादर्श मेरी मां हमीदा चट्टान की तरह खड़ी रहीं। उन्हीं की बदौलत जीवन का सबसेे सुखद क्षण 2009 में आया जब मैंने हंगरी में आयोजित कायकिंग और कैनोइंग वर्ल्ड कप में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इंडिया की जर्सी पहनी। उसके बाद फिर पीछे मुड़ कर नहीं देखा। एशियाई खेलों में जज के रूप में नियुक्त होने वाली पहली भारतीय महिला बनी। सरकार के प्रयास से श्रीनगर में पहला वाटर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स खुला जिसमें बतौर कोच सिखानेे का अवसर मिला। मैंने कश्मीर में सैकड़ोंं लड़कियों को घर की दहलीज सेे बाहर निकाला। एसीबी द्वारा 2023 मुकदमा दर्ज करने से पहले तक स्टेट में बतौर कोच 110 मेडल दिला चुकी थी।
पूूर्व जस्टिस वजीरी ने मुफ्त में लड़ा मेरा मुकदमा
बिलकिस बताती हैं कि दिल्ली हाईकोर्ट से सेवानिवृत्त जज वजीरी को किसी माध्यम से दर्ज मुकदमें की जानकारी हुई तो वह श्रीनगर आए। मुलाकात कर पूरा मामला जाना और पूरा मुकदमा मुफ्त में लड़ें। हर तारीख पर दिल्ली से अपनेे खर्च पर आते थे और कई दिनोंं तक यहीं रहकर पैरवी करते थे। उन्हीं की बदौलत आज मैं बाइज्जत बरी हुई हूं। ये ऊपर वाले का करम ही है कि उन्होंने पूर्व जज वजीरी को मेरे लिए फरिश्ता बनाकर भेजा।
डिप्रेशन में चली गई थी, मां और मेंटर बीएस अहलूवालिया बने सहाराएसीबी द्वारा बेबुनियाद एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद बिलकिस डिप्रेशन में चली गई थीं। उन्हें वाटर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स से हटा दिया गया लेकिन इस बीच मां हमीदा और कोच बीएस अहलूवालिया नेे हिम्मत बढ़ाई। मुझेे भी लगा कि जीत और हार आपकी हिम्मत ही तय करती है। मैंनेे हौसला बढ़ाया और 2024 में पेरिस ओलंपिक में भारत की एकमात्र महिला बनी जिसे कायकिंग और कैनोइंग के लिए जज के रूप में चुना गया। बताया कि 2023 में कॉम्प्लेक्स सेे हटाए जाने के बाद उन्होंने अपनेे पास बचे हुए पैसे से चार नए और पुरानेे बोट खरीदेे। उन्हीं सेे बच्चों को बादामारी में कोचिंग दे रही हैं।
अब दोगुनी रफ्तार से काम करूंगी
बिलकिस कहती हैं कि हाईकोर्ट द्वारा बेकसूर करार दिए जाने के बाद अब दोगुनी रफ्तार से काम करूंगी। मेरा सपना है कि यूरोप के वर्चस्व वाले कायकिंग और कैनोइंग में भारत को शीर्ष पर ले जाउं। खासतौर पर लड़कियां कभी हार न मानें। लड़ों, खुद को साबित करो और आगे बढ़ो। लक्ष्य तय कर ईमानदारी से काम करो। भारत में खेल को बढ़ावा देने के लिए खेल से जुड़े लोगों को जिम्मेदारी दें। अपने हीरोे अपने खिलाड़ी की इज्जत करें। उनका सम्मान करेंं।