आज विश्व रंगमंच दिवस विश्व मनाया जा रहा है। सबसे पहले 27 मार्च 1961 में अंतरराष्ट्रीय थियेटर इंस्टीट्यूट द्वारा इसको मनाने की शुरुआत की गई। यह दिन रंगमंच से जुड़े उन कलाकारों को याद करने का दिन है, जिन्होंने प्रदेश, देश और दुनिया में अपने अभिनय का लोहा मनवाया है।
जम्मू-कश्मीर डोगरी और कश्मीरी रंगमंच ने तमाम चुनौतियों से जूझते हुए अपने नए आयाम गढ़े हैं। विश्व स्तर पर प्रख्यात नाटककार और रंगमंच निर्देशक बलवंत ठाकुर ने रंगमंच की भूमिका और जिम्मेदारी, चुनौतियों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि रंगमंच शिक्षा और संचार का सबसे प्रभावी माध्यम है। सदियों से सभ्यताओं को आकार देने में रंगमंच ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने बताया कि वे दिन गए जब लोग रंगमंच को मनोरंजन के साधन मानते थे। अब रंगमंच ने अपना दायरा बढ़ा लिया है और शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह सिद्ध तथ्य है कि रंगमंच में अभिनय करने से मन, शरीर और वाणी का ध्यान विकसित होता है। अभिनय विचारों की मौखिक और गैर-मौखिक अभिव्यक्ति को बढ़ाता है। आत्मविश्वास के अलावा यह आवाज के प्रक्षेपण, शब्दों की अभिव्यक्ति और भाषा के साथ प्रवाह में भी सुधार करता है।