एनआईए मामलों के स्पेशल जज प्रेम सागर ने कहा कि मामले में गवाहों से पूछताछ की जा रही है। अभियोजन पक्ष की ओर से पेश मटीरियल की पुष्टि अभी उन अन्य संबंधित गवाहों से होनी बाकी है। इंशा पर रणबीर दंड संहिता, शस्त्र अधिनियम, यूएपीए और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के तहत मुकदमा चल रहा है। 10 दिसंबर, 2022 को उसके खिलाफ आरोप तय किए गए थे और वह छह साल से अधिक समय जेल में बिता चुका है।
कोर्ट के समक्ष पेश किए गए एनआईए के मामले के अनुसार इंशा जान ने अपने पिता पीर तारिक अहमद शाह के साथ मिलकर जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों को अपने घर में न केवल पनाह दी, बल्कि उन्हें भोजन और आवाजाही में मदद भी की।
बचाव पक्ष ने लंबे समय तक जेल में रहने से याचिकाकर्ता की सेहत पर बुरा असर पड़ने और खास मेडिकल इलाज की जरूरत का हवाला देते हुए जमानत मांगी थी। स्पेशल जज ने उसकी स्थिति को तुरंत रिहाई लायक नहीं माना। बारामुला जिला जेल के सुपरिटेंडेंट को इंशा के लिए सभी मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध कराने और हर दो सप्ताह में कोर्ट के सामने अनुपालन रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए।
पाकिस्तानी आतंकियों के भी उसके घर आने का आरोप
एनआईए ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी आतंकवादी मुहम्मद उमर फारूक और मोहम्मद कामरान अली भी जून, 2018 में इंशा जान के घर आए थे। इसके बाद से जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों का हथियार और गोला-बारूद के साथ नियमित रूप से उसके घर आना शुरू हो गया था।
इंशा के घर में फिदायीन आदिल अहमद डार का वीडियो किया रिकॉर्ड
अभियोजन पक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि जनवरी, 2019 में मुहम्मद उमर फारूक, आदिल अहमद डार और समीर अहमद डार इंशा के घर पर रुके थे। 28 तथा 29 जनवरी को फिदायीन आदिल अहमद डार का वीडियो वहीं रिकॉर्ड किया गया था, जो हमले के बाद वायरल हो गया था। एनआईए ने यह भी दावा किया कि तकनीकी विश्लेषण से संबंधित समय पर घर में इंशा जान की मौजूदगी साबित हुई है। उसने आरोपी के इस्तेमाल मोबाइल नंबर और मुहम्मद उमर फारूक के पाकिस्तानी नंबर के बीच हुई व्हाट्सएप कॉल के सबूत भी पेश किए।