जम्मू। स्पेशल जज फास्ट ट्रैक कोर्ट (पॉक्सो मामले) ने बच्चों के यौन शोषण के मामले में आरोपी दीपक शर्मा की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। स्पेशल जज ने टिप्पणी की कि पॉक्सो एक्ट के तहत जघन्य अपराध को नरमी से नहीं देखा जा सकता है। वे पुलिस स्टेशन नगरोटा में दर्ज मामले में दायर अर्जी की सुनवाई कर रही थींं। आवेदक का दावा था कि उसे झूठा फंसाया गया है।
बचाव पक्ष ने पीड़िता, उसकी मां और चाची से पहले ही पूछताछ होने का हवाला देते कहा कि कुछ ही गवाह बचे हैं। आरोपी एक साल से ज्यादा समय से कस्टडी में है। ट्रायल खत्म होने से पहले लगातार हिरासत में रखना प्री-ट्रायल सजा जैसा होगा।
अभियोजन ने दलील का विरोध करते हुए कहा कि आरोप गंभीर और गैर जमानती हैं। पीड़िता सिर्फ 12 साल की थी और आरोपी उसे जानता था। अगर जमानत पर रिहा किया गया तो उस पर गलत असर पड़ने और मेंटल ट्रॉमा का खतरा बढ़ने की आशंका है। जांच अधिकारी समेत छह गवाहों के बयान रिकॉर्ड होने बाकी हैं।
अदालत ने व्यक्तिगत आजादी को आवश्यक बताया लेकिन आरोपी की स्वतंत्रता, न्याय और सामाजिक हित के बीच संतुलन पर जोर दिया। कहा कि ऐसे अपराध पीड़ित की गरिमा, सम्मान, निजता और जीने के अधिकार पर हमला करते हैं। आरोप की गंभीरता, पीड़ित के बयान और जांच जारी होने की बात कहते हुए जमानत से इन्कार कर दिया। जेएनएफ
यह है मामला : चार्जशीट के मुताबिक बीते साल 27 अप्रैल को नाबालिग आरोपी की दुकान पर गई थी। उस दौरान आरोपी ने उसके शरीर को छुआ। उसी रात जब वह पालतू जानवर को घुमाने ले गई तो आरोपी बाइक से आया। उसे हेलमेट से टक्कर मारी और वॉशरूम के पीछे ले जाकर यौन उत्पीड़न किया। किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी।