कश्मीर के मौजूदा हालात यदि श्री अमरनाथ यात्रा के दौरान भी रहे तो इससे जुड़े हजारों लोगों को रोजी रोटी के लाले पड़ सकते हैं। अमरनाथ यात्रा से कश्मीर सहित जम्मू संभाग के कई जिलों से गुज्जर-बक्करवाल समुदाय के हजारों लोगों को करीब तीन महीने के लिए रोजगार मिलता है।
जानकारी के अनुसार राजोरी, पुंछ, उधमपुर, रियासी और कश्मीर संभाग से करीब 40 हजार घोड़े यात्रा में योगदान देते हैं। घोड़े रखने वाले यात्रा के दोनों मार्गों पर सामान पहुंचाते हैं। साथ ही यात्रियों को ले जाने में भी यह लोग ही सेवा देते हैं। यात्रियों के लिए खाने पीने की सुविधाएं, टेंटों की सुविधा, जरूरी सामान के स्टाल यहीं लोग लगाते हैं।
रियासी के रहने वाले अब्दुल का कहना है कि जितनी अधिक लंबी यात्रा होती है, उन्हें उतनी ही अधिक कमाई होती है। सर्दियों में तो वह लोग अपने घरों से बाहर नहीं आ पाते। गर्मियों में ही काम करते हैं, जिसमें अमरनाथ यात्रा मुख्य रूप से शामिल होती है। लेकिन हालात खराब रहे तो उनको यहां भी काम नहीं मिलेगा। करीब पंद्रह हजार लोगोें में प्रत्येक के पास 3 से 4 घोड़े रहते हैं। कई के पास 10 भी होते हैं। यात्रा में तीन से चार लाख तक यात्री पहुंचें तो हर एक घोड़े से यह लोग 40 से 50 हजार रुपये कमाते हैं।