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सरपंच करेंगे बैक टू विलेज कार्यक्रम का बहिष्कार

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सांबा। केंद्र सरकार की योजना बैक टू विलेज-2 कार्यक्रम का सरपंच बहिष्कार कर रहे हैं। इसी संदर्भ में शुक्रवार को सरपंचों ने प्रेसवार्ता कर सरकार को चेताया है। उन्होंने कहा कि वह बैक टू विलेज कार्यक्रम में भाग नहीं लेंगे। क्योंकि पूर्व में हुए कार्यक्रम में जो विकास कार्य बताए गए उन पर अमल नहीं किया गया।
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कैली मंडी के सरपंच लब्लु संबयाल ने कहा कि बैक टू विलेज कार्यक्रम के प्रथम चरण में जो वादे सरकार ने किए थे उन्हें पूरा ही नहीं किया गया है। जितने भी कार्यक्रम किए गए सरपंचों ने जो खर्च किया उन्हें वापस नहीं किया गया। सरकार की ओर से कहा गया था कि धन का लेनदेन डिजिटल किया जाना है आज तक उनके दस्तखत ही एक्टीवेट नहीं किए गए हैं। कहने को तो उन्हें 21 विभाग सौंपे गए, लेकिन जब भी ग्राम सभा होती है उसमें चार-पांच विभागों के कर्मी ही पहुंचते हैं। उन्होंने बताया कि पंचायत कालीबड़ी, पंचायत रख अंब टाली और पंचायत कैली मंडी को आज तक ग्रामीण विकास विभाग के पास एक्टीवेट ही नहीं किया गया है। न ही इन पंचायतों में विकास के फंड ही आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि बैक टू विलेज कार्यक्रम में उन्होंने कई विकास कार्य फर्म में भरे थे जिन पर केवल पांच लाख रुपये ही एक पंचायत को दिए गए। अब आठ वार्ड वाली पंचायतों को कैसे बांट कर फंड दिए जाएं, समस्या बनी रहती है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार उनकी मांगों को मान लेती है तो बह बैक टू विलेज कार्यक्रम में भाग लेंगे, अन्यथा वह बहिष्कार करेंगे।
इस अवसर पर दियानी के सरपंच प्रदीप ललोत्रा, कटली से बंसी लाल, बढेरी से सुनील कुमारी, सदोह के सरपंच सोमराज और रेईयां की सरपंच भी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
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बैक टू विलेज-2 कार्यक्रम के अधिकारियों को दिया प्रशिक्षण
अमर उजाला ब्यूरो
सांबा। उपायुक्त रोहित खजूरिया की देखरेख में शुक्रवार को बैक टू विलेज-2 में आने वाले अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया। उपायुक्त ने प्रशिक्षकों को बताया कि बैक टू विलेज-2 कार्यक्रम का उद्देश्य स्थानीय लोगों की सक्रिय भागीदारी से पंचायतों का समग्र विकास है। डीसी ने बैक टू विलेज-2 कार्यक्रम के संदर्भ को पूरी तरह से समझने पर जोर दिया, क्योंकि इसमें गांवों का सर्वेक्षण करने, डेटा के संकलन के अलावा फॉर्म और रिपोर्ट कार्ड भरने के बारे में गहरी समझ शामिल है।
उन्होंने प्रत्येक संदेह को दूर करने और सुचारु रूप से कार्य करने की प्रक्रिया को बनाने पर जोर दिया। मास्टर ट्रेनर ने कार्यक्रम के सभी मापदंडों के बारे में संक्षिप्त प्रस्तुति दी और बाद में एक संदेह समाशोधन सत्र आयोजित किया जहां प्रतिभागियों ने सक्रिय भागीदारी की और अपने प्रश्नों को हल किया। पंचायत के सचिव संबंधित पंचायत में नोडल अधिकारी होंगे और जीपीडीपी को प्रत्येक पंचायत को सूचित डीपीओ में अग्रिम रूप से रखा गया है। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान सहायक आयुक्त विकास सिद्धार्थ धीमान, जिला पंचायत अधिकारी, पीयूष धोत्र, मुख्य नियोजन अधिकारी, सुखलीन कौर, सचिव पंचायतों के अलावा सभी जिला अधिकारी उपस्थित रहे।
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