रामगढ़ क्षेत्र के सीमांत गांव दग में बाबा दलीप सिंह मन्हास, जिन्हें बाबा चमलियाल के नाम से भी जाना जाता है, उनकी मजार पर आज ऐतिहासिक मेला लगेगा। जीरो लाइन के पास सजने वाले इस मेले में रियासत एवं अन्य राज्यों की जनता ही नहीं, बल्कि भारत-पाक के सैन्य जवान और अधिकारी भी शामिल होते हैं। इस मौके पर गिले शिकवे भूलकर विचार साझा करने के साथ वह एक-दूसरे से उपहारों का आदान-प्रदान भी करते हैं।
मेले की तैयारियां समय से पूरी कर ली गईं थीं। जानकारों के मुताबिक की दो सौ वर्ष पूर्व दग गांव में बाबा दलीप सिंह मन्हास रहा करते थे। वह चंबल रोग का उपचार करते थे। कहा जाता है कि उनकी मौत के बाद जब लोग चंबल रोग का शिकार होने लगे तो एक दिन बाबा ने अपने शिष्य को सपने में बताया कि उनके स्थान से मिट्टी और कुएं के पानी के लेप करने से चंबल का रोग ठीक हो जाएगा।
यह विधि अपनाते ही उक्त चर्म रोग से पीड़ित लोगों को लाभ मिलने लगा। यह भी कहा जाता है कि भारत-पाक के बंटवारे से पहले से वहां के श्रद्धालु बाबा की मजार पर चादर चढ़ाने आया करते थे। और शक्कर-शरबत ले जाते थे। बाद में हालात बिगड़ने पर पाक के श्रद्धालु केवल चादर ही भेजते हैं, जिसे भारतीय सुरक्षा बल के अधिकारी बाबा की मजार पर चढ़ाते हैं।
पहले मेले का आयोजन बीएसएफ की ओर से किया जाता था, लेकिन गत तीन वर्षों से जिला प्रशासन की ओर से मेले का आयोजन किया जा रहा है। जीरो लाइन पर एक कार्यक्रम का आयोजन भी किया जाता है, जहां दोनों देशों के अधिकारी एवं आम नागरिक एक-दूसरे को उपहार देते हैं और दोनों देशाें मेें अमन की दुआ करते हैं। आज एक बार फिर ऐसा नजारा देखने का दिन है।
वहीं पाक के गांव सैदांवाली में भी एक सप्ताह तक मेला जारी रहता है। इस बार भी जिला प्रशासन की ओर से मेले को सफल बनाने के लिए हरसंभव प्रयास किए गए हैं।