साल 2002 में दोनों देशों में तनाव के चलते मेले का आयोजन मजार स्थल से दो किलोमीटर पीछे गांव दग-छन्नी में किया गया था, इसमें पाक रेंजर्स अधिकारियों ने शिरकत करना उचित नहीं समझा था। सात साल पूर्व वर्ष 2018 में भी मेला पारंपरिक रीति से संपन्न नहीं हो पाया था।
मेले से छह दिन पूर्व पाकिस्तान की ओर से की गई फायरिंग में शहीद हुए बीएसएफ के चार जवानों की शहादत के बाद भारत सरकार व केंद्रीय गृह मंत्रालय व बीएसएफ ने पाक रेंजरों को न तो मेले का न्यौता दिया था, न ही पाकिस्तान की तरफ से बाबा की मजार पर चढ़ाने के लिए चादर आई और न ही भारत की तरफ से बाबा जी की मजार का प्रसाद शरबत-शक्कर पाकिस्तान श्रद्धालुओं के लिए भेजी गई।
कोरोना के कारण साल 2020 व 2021 में जिला प्रशासन ने मेला स्थगित कर दिया था। मजार कमेटी ने मेले वाले दिन परंपरा को निभाया था और बाबा जी की मजार पर चादर चढ़ाने की रस्म अदा की गई।
सूत्रों के अनुसार इस बार भी पाक रेंजर मेले में शिरकत नहीं करेंगे और न ही पाकिस्तान से बाबा की मजार पर चढ़ाने के लिए चादर आएगी और न ही पाक श्रद्धालुओं को पवित्र मजार का शरबत-शक्कर नसीब होगा, क्योंकि भारत सरकार और गृह मंत्रालय ने पाक को मेले का कोई आमंत्रण नहीं दिया है। ग्रामीणों की प्रशासन से मांग की हैं की इस बार पाक को भी न्यौता दिया जाए। पाक में बैठे बाबा के भगतों को भी शकर शरबत मिल सके।