Dera Baba Banda Singh Bahadur Gurudwara
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गुरु गोबिंद सिंह के शिष्य रहे बाबा बंदा सिंह बहादुर का इतिहास स्कूल के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। प्रदेश सरकार पंजाबी भाषा को बढ़ावा देने के लिए पंजाबी भाषा की किताबें तमाम सार्वजनिक पुस्तकालयों में उपलब्ध करवाएगी। यह घोषणा उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने की। वह रियासी में स्थित डेरा बाबा बंदा सिंह बहादुर गुरुद्वारा में माथा टेकने के बाद उपस्थिति को संबोधित कर रहे थे।
उपराज्यपाल ने कहा कि इस पवित्र भूमि से निकलकर बाबा बंदा सिंह बहादुर ने जो महान कार्य किए, उन्हें समझना और जन-जन तक पहुंचाना जरूरी है। इतिहास पर रोशनी डालते हुए उन्होंने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह के समक्ष नंदेड़ में माधो दास ने अपने आप को गुरु चरणों में समर्पित किया और बाबा बंदा सिंह बहादुर बनकर अधिकारों का संघर्ष छेड़ दिया। ऐसी महान जीवनी युवाओं के लिए अनुकरणीय है। उपराज्यपाल ने कहा कि प्रदेश में पंजाबी भाषा को बढ़ावा देने के लिए तैयारी इसी माह से शुरू होगी। आने वाले दिनों में उनकी कहानियां पुस्तकालयों के जरिये लोगों तक पहुंचाई जाएंगी।
सड़क, घाट और संग्रहालय बनेगा
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि डेरा बाबा बंदा सिंह बहादुर गुरुद्वारा तक पर्याप्त सड़क संपर्क बनाया जाएगा। घाट का विकास किया जाएगा। इसके अलावा राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण की मदद से संग्रहालय स्थापित किया जाएगा। इसमें जम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से हर संभव मदद व सहयोग सुनिश्चित किया जाएगा। इससे पूर्व बाबा बंदा सिंह बहादुर की दसवीं पीढ़ी के वंशज गद्दीनशीन बाबा जतिंदर पाल सिंह सोढ़ी ने कहा कि युवाओं को गुरुओं के बताए मार्ग का अनुसरण करना चाहिए। पूर्व सांसद व राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण के चेयरमैन तरुण विजय ने बाबा बंदा सिंह बहादुर की जीवनी को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की मांग की। डेरा बाबा बंदा सिंह बहादुर के सचिव एसएस पाहवा ने धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया।