भारतीय संस्कृति का प्राण है संस्कृत भाषा : उपकुलपति
जम्मू। जम्मू विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग में शुक्रवार को संस्कृत विभाग और श्री काशी विद्वत परिषद के सहयोग से संस्कृत अध्यापक - शोध छात्र मिलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के शुभारंभ परिसर में मुख्यातिथि उप-कुलपति कलस्टर विश्वविद्यालय प्रो. बेचन लाल ने रुद्राक्ष का पौधा लगाकर किया। उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा केवल कोई भाषा नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति का प्राण है। संस्कृत भाषा की महत्ता को देखते हुए अभिभावकों को अपने बच्चों को संस्कृत भाषा का ज्ञान अनिवार्य रूप से कराने की आवश्यकता है।
सारस्वत अतिथि के रूप में प्रो. परीक्षित सिंह मन्हास ने कहा कि संस्कृत भाषा प्रदेश की अति प्राचीन भाषा है। इसके ज्ञान का महत्त्व बच्चों को पढ़ने में सकारात्मक दिशा देता है। काशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष पद्म श्री प्रो. विश्वमूर्ति शास्त्री ने इस अवसर पर प्रदेश में संस्कृत की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हमारा प्रदेश संस्कृत भाषा के साथ-साथ ज्ञान विज्ञान का केंद्र था परंतु आज यहां की स्थिति निराशाजनक है। कला संकाय अध्यक्षा प्रो. सुचेता पठानिया ने कहा कि संस्कृत भाषा के उत्थान के लिए समाज को मिलकर काम करने की आवश्यकता है जिससे भारतीय संस्कृति का संरक्षण निहित है।