Omar Abdullah and Mehbooba Mufti
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पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला ने उच्चतम न्यायालय द्वारा राज्यों को दिए गए इस निर्देश का स्वागत किया कि पुलवामा हमले के बाद कश्मीरियों को धमकी, हमले और सामाजिक बहिष्कार की घटनाओं को रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई की जाए। पीडीपी प्रमुख महबूबा ने ट्विटर पर कहा कि शीर्ष अदालत के इस आदेश पर राहत महसूस की कि यह सुनिश्चित हो कि जम्मू कश्मीर से बाहर मौजूद कश्मीरी छात्रों का उत्पीड़न या सामाजिक बहिष्कार नहीं हो।
माननीय न्यायपालिका ने निर्णायक कदम उठाया लेकिन शर्मनाक है कि अन्य ने आराम से इसे नजरअंदाज कर दिया। नेशनल कांफ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर ने कहा कि वह इस कदम के लिए उच्चतम न्यायालय के आभारी हैं लेकिन यह काम केंद्र की सरकार को करना चाहिए था। ट्वीट किया कि जो काम दिल्ली की निर्वाचित नेतृत्व को करना चाहिए था, उसे करने के लिए माननीय उच्चतम न्यायालय का आभार। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री इससे इंकार करने में लगे हैं और राज्यपाल धमकियां देने में व्यस्त हैं। माननीय उच्चतम न्यायालय का कदम उठाने पर धन्यवाद।
भाजपा के सहयोगियों के भी बोलने से खुशी
पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा कि उन्हें खुशी है कि भाजपा के सहयोगी पुलवामा हमले के आलोक में कश्मीरियों के साथ हो रही नाइंसाफी के खिलाफ बोल रहे हैं। उन्होंने इस मुद्दे पर अन्य लोगों की चुप्पी की आलोचना भी की। ट्वीट किया कि खुशी है कि अकाली दल की हरसिमरत बादल जैसे भाजपा के सहयोगी निर्दोष कश्मीरियों के साथ की जा रही नाइंसाफी के खिलाफ बोल रहे हैं। अब भी इनकार की मुद्रा में रहने वाले लोग सच्चाई से दूर हैं।
सियोल शांति पुरस्कार जीतने पर दी बधाई
महबूबा ने एक अन्य ट्वीट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सियोल शांति पुरस्कार पर बधाई देते हुए उन्होंने लिखा कि सियोल शांति पुरस्कार जीतने पर प्रधानमंत्री को बधाई। लेकिन सर, भारत में हम अब भी आपसे देशभर में कश्मीरियों पर हो रहे हमलों की निंदा की आस लगाए बैठे हैं। लेकिन व्यक्ति को तब क्या उम्मीद हो जब राज्यपाल भी भड़काऊ बयान देकर आसानी से बच निकलें।