सरकारी कर्मियों को सातवें वेतन आयोग का लाभ मिला है। हरेक कर्मचारी को न्यूनतम 11 हजार रुपये का लाभ हर महीने हो रहा है। कर्मचारी बीमा अधिनियम 1948 के तहत जम्मू- कश्मीर कर्मचारी बीमा सोसायटी बनाई गई। इसके तहत 2.95 लाख बीमित लोगों के लिए स्वास्थ्य बीमा व अन्य सुविधाएं सुनिश्चित करेगी। साथ ही सदस्य संख्या बढ़ाकर 6 लाख तक करने का लक्ष्य रखा गया है।
अमूमन जम्मू-कश्मीर देशभर में आतंकी हमलों तथा पत्थरबाजी की घटनाओं से सुर्खियों में रहा है। सुरक्षा बलों पर हमले व पत्थरबाजी, जुमे की नमाज के बाद हिंसक प्रदर्शनों से जूझने में सुरक्षा बलों का पूरा अमला लगा रहता था। अनुच्छेद 370 हटने के बाद गिनी चुनी घटनाएं ही पत्थरबाजी की हुईं। सीआरपीएफ के एक अधिकारी ने बताया कि पहले आंसू गैस के गोले प्रदर्शनकारियों को तितर बितर करने के लिए दागने पड़ते थे। अब बिल्कुल शांति है। छिटपुट पत्थरबाजी की घटनाएं हुईं, जिनका आंकड़ा दहाई से अधिक नहीं है। यदि घाटी में यही हालत रहे तो सुरक्षा खर्च में काफी कमी आ सकती है।
नए जम्मू कश्मीर में उद्योग धंधे आने की भी उम्मीद बंधी है। अब तक अनुच्छेद 370 व 35ए इसमें बाधक था। सरकार को उम्मीद है कि अप्रैल महीने में प्रस्तावित निवेशक सम्मेलन में 50 हजार करोड़ रुपये से भी अधिक के निवेश पर सहमति बन सकती है। देश की कंपनियों के साथ ही इंग्लैंड, जापान, सऊदी अरब, सिंगापुर आदि देशों की कंपनियां भी यहां आएंगी। इससे यहां रोजगार के अवसर भी सुलभ होंगे।
नए जम्मू-कश्मीर में बेशक कई चीजों से आजादी मिल गई हो, लेकिन बंदिशें अब भी हैं। मोबाइल इंटरनेट पूरी तरह बहाल नहीं हो पाया है। 4जी के बजाय 2जी मोबाइल इंटरनेट सेवा से ही लोगों को काम चलाना पड़ रहा है। इसके साथ ही अस्पतालों, सरकारी कार्यालयों को छोड़कर कश्मीर घाटी में ब्राड बैंड सेवा भी नहीं है।
सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर नए जम्मू-कश्मीर का सपना साकार हुआ है। इसी दिन जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर व लद्दाख में बांटा गया। इसके साथ ही दोनों केंद्र शासित प्रदेश के उप राज्यपाल ने पदभार भी संभाला।