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नए जम्मू-कश्मीर के 100 दिनः कई चीजों से मिली आजादी लेकिन ये बंदिशें अब भी हैं

Fri, 07 Feb 2020 11:49 AM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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नए जम्मू-कश्मीर के 100 दिन - फोटो : अमर उजाला
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अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में सौ दिन के भीतर कई बदलाव हुए हैं। प्रशासनिक स्तर पर पूरी व्यवस्था को बदल दिया गया है। नए निजाम में आतंकी गतिविधियां भी कम हुईं, लेकिन धरातल पर आम लोगों में असमंजस भी बरकरार है। तमाम विरोध के बावजूद प्रदेश में जमीन की रजिस्ट्री की व्यवस्था बदल गई है। अब कोर्ट के बजाय राजस्व विभाग में जमीन की रजिस्ट्री हो रही है।

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नए निजाम में आरक्षण व्यवस्था में बदलाव करते हुए प्रदेश के पहाड़ी समुदाय को भी इसमें शामिल कर दिया है। लेकिन अनुच्छेद 370 और 35 ए हटाने के बाद डोमिसाइल व्यवस्था की मांग कर रहे प्रदेश के लोगों को जमीन और नौकरी में विशेषाधिकार यूटी बनने के सौ दिन बाद भी नहीं मिला है।

हालांकि, केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद लखनपुर में एंट्री टैक्स खत्म करने से जम्मू-कश्मीर में वन नेशन वन टैक्स का सपना साकार हुआ है। इससे प्रदेश में बाहर से आने वाला सामान भी कुछ सस्ता हो गया है। केंद्र के लगभग 800 कानून प्रदेश में लागू होते ही जम्मू-कश्मीर के अपने 135 कानूनों का अस्तित्व खत्म हो गया है।
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केंद्र शासित प्रदेश बनने के साथ ही अब कोई भी व्यक्ति आसानी से आरटीआई दाखिल कर जरूरी जानकारी हासिल कर सकता है। जम्मू-कश्मीर सरकार के शिकायती पोर्टल की आनलाइन केंद्र से मॉनीटरिंग होने लगी है। इससे शिकायतों के निस्तारण में तेजी आई है। हालिया बजट में करीब 31 हजार करोड़ रुपये की सौगात मिली है। इससे विकास कार्यों तथा आधारभूत संरचनाओं के निर्माण में तेजी आएगी।

उद्योग धंधे आने की उम्मीद जगी, बढ़ेंगे रोजगार के साधन

सरकारी कर्मियों को सातवें वेतन आयोग का लाभ मिला है। हरेक कर्मचारी को न्यूनतम 11 हजार रुपये का लाभ हर महीने हो रहा है। कर्मचारी बीमा अधिनियम 1948 के तहत जम्मू- कश्मीर कर्मचारी बीमा सोसायटी बनाई गई। इसके तहत 2.95 लाख बीमित लोगों के लिए स्वास्थ्य बीमा व अन्य सुविधाएं सुनिश्चित करेगी। साथ ही सदस्य संख्या बढ़ाकर 6 लाख तक करने का लक्ष्य रखा गया है।

अमूमन जम्मू-कश्मीर देशभर में आतंकी हमलों तथा पत्थरबाजी की घटनाओं से सुर्खियों में रहा है। सुरक्षा बलों पर हमले व पत्थरबाजी, जुमे की नमाज के बाद हिंसक प्रदर्शनों से जूझने में सुरक्षा बलों का पूरा अमला लगा रहता था। अनुच्छेद 370 हटने के बाद गिनी चुनी घटनाएं ही पत्थरबाजी की हुईं। सीआरपीएफ के एक अधिकारी ने बताया कि पहले आंसू गैस के गोले प्रदर्शनकारियों को तितर बितर करने के लिए दागने पड़ते थे। अब बिल्कुल शांति है। छिटपुट पत्थरबाजी की घटनाएं हुईं, जिनका आंकड़ा दहाई से अधिक नहीं है। यदि घाटी में यही हालत रहे तो सुरक्षा खर्च में काफी कमी आ सकती है।

नए जम्मू कश्मीर में उद्योग धंधे आने की भी उम्मीद बंधी है। अब तक अनुच्छेद 370 व 35ए इसमें बाधक था। सरकार को उम्मीद है कि अप्रैल महीने में प्रस्तावित निवेशक सम्मेलन में 50 हजार करोड़ रुपये से भी अधिक के निवेश पर सहमति बन सकती है। देश की कंपनियों के साथ ही इंग्लैंड, जापान, सऊदी अरब, सिंगापुर आदि देशों की कंपनियां भी यहां आएंगी। इससे यहां रोजगार के अवसर भी सुलभ होंगे।

 
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सरदार पटेल की जयंती पर नया जम्मू-कश्मीर

नए जम्मू-कश्मीर में बेशक कई चीजों से आजादी मिल गई हो, लेकिन बंदिशें अब भी हैं। मोबाइल इंटरनेट पूरी तरह बहाल नहीं हो पाया है। 4जी के बजाय 2जी मोबाइल इंटरनेट सेवा से ही लोगों को काम चलाना पड़ रहा है। इसके साथ ही अस्पतालों, सरकारी कार्यालयों को छोड़कर कश्मीर घाटी में ब्राड बैंड सेवा भी नहीं है।

सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर नए जम्मू-कश्मीर का सपना साकार हुआ है। इसी दिन जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर व लद्दाख में बांटा गया। इसके साथ ही दोनों केंद्र शासित प्रदेश के उप राज्यपाल ने पदभार भी संभाला।
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