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Article 370: 34 साल बाद मोहर्रम जुलूस, सूर्यमंदिर पहुंचे कश्मीरी पंडित, 370 के बाद ये हुए बड़े बदलाव

Sat, 05 Aug 2023 11:55 AM IST
kumar गुलशन कुमार डॉ. बृजेश कुमार सिंह, जम्मू

सार

बड़े बदलाव के रूप में 34 साल बाद श्रीनगर की सड़कों पर शिया समुदाय ने मोहर्रम का जुलूस निकाला। पहली बार राज्य के किसी मुखिया ने इसमें न केवल शिरकत की, बल्कि अजादारों को जलपान भी वितरित किया। 
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लाल चौक, श्रीनगर - फोटो : बासित जरगर
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विस्तार
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अनुच्छेद 370 को जम्मू-कश्मीर से हटे चार साल पूरे हो गए। मौजूदा उपराज्यपाल मनोज सिन्हा का तीन साल का कार्यकाल भी सात अगस्त को पूरा हो जाएगा। इन चार सालों में धरातल पर आबोहवा बिल्कुल बदल गई है। आतंकवाद के दौर में घाटी से विलुप्त हो गई फिल्म संस्कृति दोबारा जीवंत हो उठी है। 

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आतंकवाद ग्रस्त रहे जिलों शोपियां, पुलवामा, कुलगाम, बारामुला, कुपवाड़ा व श्रीनगर में सिनेमा हॉल खुल गए हैं, जो खचाखच भरे पड़े हैं। बड़े बदलाव के रूप में 34 साल बाद श्रीनगर की सड़कों पर शिया समुदाय ने मोहर्रम का जुलूस निकाला। पहली बार राज्य के किसी मुखिया ने इसमें न केवल शिरकत की, बल्कि अजादारों को जलपान भी वितरित किया। 

पहली बार कश्मीरी पंडितों को राजनीतिक रूप से सशक्त करने के लिए विधानसभा की दो सीटों पर मनोनयन का अधिकार मिला। इतना ही पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर के एक नुमाइंदे का भी विधानसभा में प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया। 1990 के बाद पहली बार भारी संख्या में कश्मीरी पंडित अपने पूर्वजों का पिंडदान करने 30 जुलाई को अनंतनाग के मट्टन स्थित मार्तंड सूर्य मंदिर में पहुंचे। सांप्रदायिक सौहार्द का परिचय देते हुए मुस्लिम परिवार के सदस्यों ने अपने कश्मीरी पंडित भाइयों के बीच फल वितरित किए।
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जी20 पर्यटन समूह की बैठक सकुशल संपन्न

बड़ा बदलाव यह भी रहा कि जी20 पर्यटन समूह की बैठक सकुशल संपन्न हो गई। किसी भी प्रकार की कोई घटना नहीं हुई। इससे पाकिस्तान, चीन समेत पूरे विश्व को कश्मीर का सच दिखाने में बड़ी कूटनीतिक सफलता मिली। 

शारदा मंदिर का हुआ जीर्णोद्धार

1947 में कबायलियों के हमले में एलओसी पर टिटवाल में तहस नहस शारदा मंदिर का जीर्णोद्धार इस साल मार्च में किया गया। हिंदू-मुसलमान भाईचारे की मिसाल के तौर पर तैयार इस मंदिर का गृह मंत्री अमित शाह ने ऑनलाइन उद्घाटन किया। 

कश्मीर के माहौल में आए बदलाव व शांति का परिणाम ही है कि पूरा बॉलीवुड अब कश्मीर की ओर देख रहा है। 300 से अधिक फिल्मों की शूटिंग की प्रदेश प्रशासन अनुमति दे चुका है।नए जम्मू-कश्मीर की बदली फिजा में डल देर रात तक आबाद रह रहा है। नाइट लाइफ लौट आया है। देर रात तक लोग सड़कों पर आईसक्रीम खाते दिख जाएंगे और खेल के मैदान खेलप्रेमियों से खचाखच भरे रह रहे हैं। अलगाववादियों के गढ़ डाउन टाउन तथा ऐतिहासिक लाल चौक पर शान से तिरंगा फहरता है। अब कश्मीर के लोगों को तिरंगे से परहेज नहीं रह गया है। 

डल झील में तिरंगा शिकारा रैली हुई आयोजित

डल झील में तिरंगा शिकारा रैली निकलती है तो स्कूल-कॉलेजों में राष्ट्रगान भी गाए जा रहे हैं। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत ऐतिहासिक लाल चौक पर क्लॉक टॉवर को यूरोपियन डिजाइन से तैयार किया गया है। रात में रोशनी से नहाए लाल चौक की छवि मिनी पेरिस का अहसास करा रही है। माहौल में बदलाव का ही परिणाम है कि चार साल में एक भी दिन घाटी में बंद की कॉल नहीं आई। न ही पाकिस्तानी झंडे लहराए गए और न ही देशविरोधी नारेबाजी की गई। पत्थरबाजी भी सड़कों से गायब हो गई। अलगाववाद की राह चलने वाले लोगों ने अपना रास्ता बदल लिया है। अब इनकी आम लोग बात नहीं सुनते।

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पर्यटक लगातार बढ़ रहे, सात महीने में 1.27 करोड़ आए पर्यटक

कश्मीर की फिजां में बदलाव का ही असर है कि पर्यटक लगातार बढ़ रहे हैं। वर्ष 2022 में 1.88 करोड़ पर्यटक आए थे तो इस वर्ष के सात महीनों में 1.27 करोड़ सैलानियों ने घाटी का रुख किया है। इसमें विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं। साल अंत तक 2.25 करोड़ पर्यटकों के आने की उम्मीद है। 

इससे रोजगार सृजन के साथ ही सामाजिक आर्थिक व्यवस्था में भी सुधार होगा। अमरनाथ यात्रा में अब तक चार लाख से अधिक यात्री आ चुके हैं। बॉलीवुड अभिनेत्री सारा अली खान, बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल के अलावा कैलिफोर्निया, फ्रांस व नेपाल के विदेशी मेहमानों ने भी बाबा भोले के दरबार में माथा टेका।

सलाहुद्दीन, गिलानी, बिट्टा कराटे के परिवार वाले समेत 52 सरकारी नौकरी से बाहर

आतंकवाद तथा भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए प्रदेश सरकार ने टेरर लिंक में 52 सरकारी अफसरों को बर्खास्त कर दिया। इनमें सैय्यद सलाहुदीन के बेटों सैय्यद अब्दुल मुईद, शाहिद युसूफ व सैय्यद अहमद शकील को बर्खास्त किया गया। अब्दुल मुईद जम्मू कश्मीर उद्यमिता विकास संस्थान ( जेकेईडीआई) में 2012 में मैनेजर के पद पर नियुक्त किया गया और 2013 से 2019 के बीच इस संस्थान में कई हमले हुए। 

2016 में हुए हमले में कई सुरक्षाकर्मियों की जान चली गई थी। हुर्रियत नेता सैय्यद अली शाह गिलानी के नाती व दामाद अल्ताफ अहमद शाह उर्फ फंटूश के बेटे अनीस उल इस्लाम को महत्वपूर्ण संस्थान शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर के रिसर्च आफिसर पद से हटाया गया। 

जमात ए इस्लामी के सदस्य व सक्रिय आतंकी रहे कश्मीर विश्वविद्यालय के प्रो. अल्ताफ हुसैन पंडित, खूंखार आतंकी फारूक अहमद शाह उर्फ बिट्टा कराटे की पत्नी व केएएस अफसर अशबाह-उल-रजामंद को जेकेएलएफ आतंकियों व अलगाववादी संगठनों से जुड़ाव के लिए बाहर का रास्ता दिखाया गया। शोपियां के आशिया व नीलोफर की स्वाभाविक मौत मामले में पाकिस्तान तथा आईएसआई के इशारे पर रेप व हत्या की फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनाने वाले डॉ. निगहत शाहिन चिल्लू व डॉ. बिलाल अहमद दलाल को बर्खास्त किया गया। 

इस फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट से घाटी में कई महीने तक हिंसा की आग भड़कती रही। अभी और भी दागी सरकार के निशाने पर हैं, जिनकी जांच चल रही है। आतंकवाद के इको सिस्टम पर भी प्रहार करना शुरू किया गया है। आतंकियों की संपत्तियों को कब्जे में लेने के साथ ही मकानों पर बुलडोजर चलाया जा रहा है। किश्तवाड़ में 36 आतंकियों के खिलाफ इंटरपोल का नोटिस जारी किया गया है। यह आतंकी पाकिस्तान में बैठकर यहां नेटवर्क चला रहे हैं।
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